सीएम से शिकायत होने के दूसरे दिन ही जारी हुआ टेंडर
बरेली। गड़बड़-घोटालों के आरोपों के साथ शुरू हुआ स्मार्ट सिटी का सफर किसी उपलब्धि के बगैर अब तक उसी राह पर चल रहा है। मुख्यमंत्री से मेयर की शिकायतों के बावजूद बुधवार को आनन-फानन में 180 करोड़ के इंटिग्रेटेड कमांड कंट्रोल सिस्टम यानी आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट का टेंडर हनीवेल नाम की कंपनी की झोली में आकर गिरा और इसके साथ स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ के ऐन मौके पर पत्र जारी कर तकनीकी कमेटी के सदस्यों में रद्दोबदल के साथ उसकी बैठक की तारीख में गड़बड़ी सवालों के घेरे में आ गई।
आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के टेंडरों में धांधली की शिकायत मेयर उमेश गौतम ने मंगलवार को ही लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी। इसके बावजूद अफसरों ने मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई निर्देश आने की संभावनाओं को नजरंदाज कर आनन-फानन में बुधवार को टेंडर फाइनल कर दिया। इस टेंडर के लिए हनीवेल, एल एंड टी और केईसी समेत तीन कंपनियों ने पिछले सप्ताह गुरुवार और शुक्रवार को एलन क्लब और कमिश्नरी में प्रस्तुति दी थी उनकी रिपोर्ट तैयार की गई थी। टेंडर तकनीकी और फाइनलेंसियल बिड में मिले ओवरऑल स्कोर के आधार पर मंजूर होना था। एल एंड टी और हनीवेल के बीच टेक्निकल बिड में मुकाबला रहा लेकिन फाइनेंसियल बिड में एल एंड टी पिछड़ गई। हालांकि मेयर का आरोप यह भी था कि अफसरों ने टेंडर के लिए ऐसी शर्तें तय की थीं ताकि देश की कोई नामी कंपनी इसमें भाग न ले सके। इसी वजह से इस टेंडर में सिर्फ तीन कंपनी ही हिस्सा ले पाईं।
उधर, स्मार्ट सिटी के जीएम संजय सिंह चौहान ने बताया कि बुधवार को फाइनेंसियल बिड निकालने पर हनीवेल कंपनी का टेक्निकल बिड में स्कोर 96.75 और एल एंड टी का स्कोर 95.50 रहा। केईसी का स्कोर 85.50 ही रह गया। फाइनेंसियल बिड में भी हनीवेल ने 163.32 टेंडर वैल्यू डाली थी जो तीनों कंपनियों में सबसे कम थी। एल एंड टी ने टेंडर के लिए 199.85 करोड़ और केईसी ने 224.13 करोड़ रुपये की वैल्यू डाली थी। टेक्निकल और फाइनेंसियल बिड के आधार पर हनीवेल का ओवरऑल स्कोर 97.73 रहा। एल एंड टी 91.37 और केईसी 81.17 के स्कोर पर सीमित रह गईं।
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की सीएम से शिकायत कर चुका हूं। उन्हें पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है। स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दूंगा। स्मार्ट सिटी मिशन में चहेती कंपनियों को टेंडर दिए जा रहे हैं। -डॉ. उमेश गौतम, मेयर
मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद सीईओ की चिट्ठी भी कह रही है कुछ अलग कहानी
बरेली। मेयर उमेश गौतम ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री से आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के टेंडर में धांधली की शिकायत की और बुधवार को ही सीईओ अभिषेक आनंद ने तकनीकी कमेटी की बैठक के लिए पत्र जारी कर दिया। सवाल तब उठे जब दो सितंबर की तारीख में जारी इस पत्र में तकनीकी कमेटी के सदस्यों को 27 और 28 अगस्त को इस बैठक में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। तकनीकी कमेटी के सदस्यों में भी कुछ रद्दोबदल कर दी गई। दिलचस्प यह भी है कि तीनों कंपनियों की प्रस्तुति इससे पहले ही हो चुकी थी।
तकनीकी कमेटी की बैठक के लिए इस पत्र में डीएम नीतीश कुमार, एसएसपी शैलेश पांडे, उपाध्यक्ष बीडीए दिव्या मित्तल, नगर आयुक्त अभिषेक आनंद और जिला सूचना विज्ञान केंद्र के अधिकारी का नाम है। इस पत्र के चर्चा में आने के बाद घोटाले के आरोपों को और बल मिल गया। पत्र में उल्लेख किया गया है कि टेंडरों के तकनीकी परीक्षण और प्रस्तुतीकरण के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में तकनीकी कमेटी बनी थी लेकिन इसमें संशोधन किया गया है। पत्र इसलिए भी सवालों के घेरे में आ गया क्योंकि तकनीकी कमेटी में संशोधन की जानकारी प्रस्तुति के पहले दी जानी चाहिए थी जो अब दी गई है।
बता दें पहले बनी तकनीकी कमेटी में कमिश्नर के साथ डीएम, एसएसपी, बीडीए वीसी, नगर आयुक्त और कानपुर के आईआईटी के एक तकनीकी एक्सपर्ट को रखा गया था लेकिन बाद में उन्हें अनुपलब्ध बताते हुए उनकी जगह पर जिला सूचना अधिकारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान को शामिल किया गया।
स्मार्ट सिटी के दो साल, उपलब्धि एक भी नहीं.. घोटालों के आरोप बेशुमार
- 1- स्मार्ट सिटी में 180 करोड़ के आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के टेंडर के लिए पहले डीपीआर की आरएफपी को बदल दिया गया। इसे तैयार करने वाली अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने इस पर आपत्ति जताते हुए इस डीपीआर से खुद को अलग करने तक का पत्र भेज दिया था। स्मार्ट सिटी मिशन के अधिकारियों ने पहले तो एएमयू को गलत साबित करने की कोशिश की, फिर दोबारा डीपीआर भेजकर उसकी संस्तुति हासिल की।
- 2- केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के हस्तक्षेप के बाद शहर में चार जगहों पर बनने वाले वर्टिकल गार्डन के टेंडरों को निरस्त करना पड़ा था। इसके टेंडर में भी तमाम खामियों का मामला सामने आया था जिसके बाद केंद्रीय मंत्री ने इस पर नाराजगी जताई थी।
- 3- लाइटों की खरीद में भी नियमों को ताक पर रखकर टेंडर मंजूर करने के आरोप लगे थे। स्मार्ट सिटी अधिकारियों के खिलाफ दूसरे राज्य के लाइसेंस पर करोड़ों के टेंडर आवंटित करने की शिकायतें की गई थीं।
सवा सौ करोड़ के घोटाले में गिरफ्तार हो गया स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट मैनेजर
स्मार्ट सिटी में अफसरों की मंशा तब भी साफ हुई जब यमुना एक्सप्रेस वे में करीब सवा सौ करोड़ रुपये के घोटाले के अंजाम देकर फरार हुए पीसीएस अफसर सतीश कुमार को यहां गुपचुप ढंग से स्मार्ट सिटी मिशन का प्रोजेक्ट मैनेजर बना दिया गया। अमर उजाला ने ही इसका खुलासा किया था। बाद में सतीश कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। घोटालेबाज अफसर सतीश कुमार पर बरेली के एक बड़े साहब का हाथ बताया जा रहा था। उन्हीं के निर्देश पर उसे अवैध रूप से सर्किट हाउस में रुकने के लिए एक कक्ष तक आवंटित कर दिया गया था। साथ ही एक सरकारी गाड़ी भी दे दी गई थी।