हम हिंदी भाषी हैं। हिंदी बोलने के लिए हमें भाषा सीखने की जरूरत नहीं। समाज का एक फीसदी वर्ग ही अंग्रेजी भाषा का अधिक प्रयोग करता है। गांव, कस्बों और शहर में भी हिंदी ही रची बसी है लेकिन बड़े महानगरों का उच्च वर्ग अंग्रेजी के आवरण में कैद है। यहीं पर बदलाव की ज्यादा जरूरत है। - डॉ. रीना अग्रवाल, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र बरेली कॉलेज
हिंदी भाषा का विकास तभी होगा जब क्लिष्ट हिंदी को स्वीकार करेंगे। हिंदी अब खिचड़ी भाषा बनती जा रही है। कार्यालयों में कामकाज, बातचीत, लिखना-पढ़ना सब हिंदी में होना चाहिए ताकि राष्ट्रव्यापी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले। युवा पीढ़ी को यह दायित्व निभाने की जरूरत है। - तपन वर्मा, तकनीकी सहायक मीडिया सेल रुहेलखंड विश्वविद्यालय
हिंदी के विकास के लिए सबसे पहले कॉन्वेंट स्कूलों में अंग्रेजी की पढ़ाई बंद कराने का फैसला सरकार को करना होगा। अंग्रेजी अब स्टेटस सिंबल बनती जा रही है जिसे अलग कर शुद्ध हिंदी बोलने पर लोगों को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि हिंदी बोलकर गौरव का एहसास हो सके।- राजीव मेहरोत्रा, एसोसिएट प्रोफेसर वाणिज्य विभाग बरेली कॉलेज
बच्चों के पास पढ़ने के लिए हिंदी साहित्य या पाठ्यक्रम ही नहीं है। विज्ञान संबंधी विषयों की पढ़ाई का पाठ्यक्रम भी हिंदी में अनुवादित होना चाहिए। इसके अलावा इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल विषयों की पढ़ाई के लिए भी हिंदी भाषा में पुस्तकें होना जरूरी है। समाज को इसकी पहल करनी होगी। - डॉ. आलोक श्रीवास्तव, प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान रुहेलखंड विश्वविद्यालय