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हिंदी हैं हमः पाठ्यक्रम अंग्रेजी में चलेगा पर हिंदी में ही हो शोध

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हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
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शिक्षकों ने जताई उम्मीद- शोध कार्य हिंदी में होने से नए छात्रों में बढ़ेगा भाषा का ज्ञान

बरेली। हिंदी भाषा के विकास के लिए सरकारी प्रयासों के अलावा विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों को भी पहल करनी चाहिए। पाठ्यक्रमों की विभिन्न पुस्तकें अगर अंग्रेजी में हैं तो उन्हें हिंदी में भी अनुवादित करने का प्रयास करना चाहिए। शोध छात्रों को भी हिंदी में ही शोध कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा ताकि नए छात्रों को हिंदी में साहित्य उपलब्ध हो सके।
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वरिष्ठ शिक्षकों के अनुसार अधिकांश बच्चे अंग्रेजी भाषा ही नहीं सीखते हैं बल्कि उसके साथ अंग्रेजी संस्कृति भी अपना लेते हैं। भाषा सिर्फ ज्ञान की ही नहीं बल्कि एक देश, समाज या वर्ग की परिचायक होती है। भाषा के साथ उसका संस्कार भी अपना लिया जाता है। जो अंग्रेजी भाषा में बात करते हैं, उनके रंग-ढंग भी उसी के अनुसार बदलते जाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि यह उचित है कि बच्चों को भविष्य में प्रोफेशनल कोर्स, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, जज आदि पद हासिल करने के लिए अंग्रेजी का ज्ञान जरूरी है। क्योंकि पुस्तकों को हिंदी में अनुवादित ही नहीं किया गया है। इसी कारण नई पीढ़ी को हिंदी में पाठ्यपुस्तक नहीं मिल सकी।
  • हिंदी भाषा के विकास के लिए जरूरी है कि समाज के जरिए उसे सर्वांगीण तौर पर स्वीकार किया जाए। अंग्रेजी में पाठ्य पुस्तकों के उपलब्ध होने की सबसे बड़ी वजह है कि जो पुराना पाठ्यक्रम था, उसे हिंदी में अनुवादित नहीं किया गया। इस कारण आने वाली पीढ़ियों को यह दायित्व निभाना होगा। - उर्मिला बाजपेयी, प्रधानाचार्य सेक्रेड हार्ट्स
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  • अंग्रेजी को वैश्विक भाषा बनाने में उनके पूरे समाज का योगदान है। शायद ही किसी विदेशी लेखक, शिक्षक ने हिंदी में कोई पुस्तक लिखी हो लेकिन भारत में हिंदी के कई लेखक और शिक्षकों ने अंग्रेजी में पुस्तकें लिखी हैं। जब तक अपनी भाषा के प्रति प्रबुद्ध वर्ग सजग नहीं होगा बदलाव संभव नहीं है। - पूनम, प्रधानाचार्य अल्मा मातेर
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  • बात सिर्फ हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार की ही नहीं बल्कि उसे वैश्विक परिदृश्य पर लाने की भी है। दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है पर रोजगार की भाषा नहीं बन पा रही है। यही सबसे बड़ी वजह है कि विद्यार्थी हिंदी भाषा बोलते हैं पर भविष्य अंग्रेजी में खोजते हैं। - संयोगिता चौधरी, उप प्रधानाचार्य विद्या भवन स्कूल
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  • रोजगार की भाषा हिंदी हो इसके लिए जरूरी है कि प्रबुद्ध वर्ग जिसमें शिक्षक, शोध छात्र, विद्वान, लेखक आदि शामिल हैं, वह रचनाएं हिंदी में करें। ताकि हिंदी भाषा में ही आने वाली पीढ़ियों को पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सके। विकास के लिए मूल भाषा के साथ अंग्रेजी व अन्य भाषा का ज्ञान भी जरूरी है। - हिमांशु भारद्वाज, शिक्षक बीबीएल पब्लिक स्कूल
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