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टूटे-फूटे धुंधले डिवाइडरों से संकेतक नदारद, शहर की सड़कों पर सुरक्षित नहीं सफर

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बरेली। मौसम में बदलाव के साथ ही कोहरे ने दस्तक दे दी है, मगर शहर के डिवाइडर हादसों को बुलावा दे रहे हैं। शहर में बेतरतीब दौड़ते ट्रैक्टर-ट्रालियों ने इन डिवाइडरों को क्षतिग्रस्त तो किया ही है, इनके संकेतक भी गायब हो चुके हैं। सबसे खराब स्थिति पीलीभीत बाईपास और स्टेडियम रोड की है। यहां के डिवाइडर भी हादसों का सबब बन सकते हैं। शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने जब इन सड़कों का जायजा लिया तो ऐसा ही स्थिति सामने आई।
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पीलीभीत बाईपास : संकेतक की जगह खड़े यूनिपोल
पीलीभीत बाईपास के डिवाइडर पर संकेतक की जगह यूनिपोल ने ले ली है। सेटेलाइट से फीनिक्स मॉल तक अधिकांश संकेतक गायब हो गए हैं। कहीं पर संकेतक लगा भी है तो वह क्षतिग्रस्त है या फिर उस पर पोस्टर चिपका हुआ है। ऐसे में रात के दौरान यह नजर नहीं आते हैं। बीसलपुर मोड़ पर भी संकेतक तहस-नहस हो चुके हैं।
स्टेडियम रोड : जरूरत के हिसाब से काट लिया डिवाइडर
श्यामगंज फ्लाईओवर से संजयनगर तिराहे तक डिवाइडर की ऊंचाई कम है। वाहनों के टकराने से जगह-जगह डिवाइडर टूट गया है। वहीं लोगों ने अपनी जरूरत के मुताबिक जगह-जगह इसमें अवैध कट बना लिए हैं। कुछ जगह तो दस-दस मीटर की दूरी पर कट बने हुए हैं। पूरे डिवाइडर पर कहीं भी कोई रिफ्लेक्टर नहीं लगा है।
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रामपुर रोड : हादसों के बाद भी नहीं लगाए रिफ्लेक्टर
जज साहब की धर्मशाला के सामने डिवाइडर पर कई बार हादसे हो चुके हैं लेकिन अब तक यहां रिफ्लेक्टर नहीं लगे हैं। सिटी श्मशान भूमि क्रॉसिंग पर कट के सामने ही यूनिपोल लगा है लेकिन उस पर भी कोई रिफ्लेक्टर नहीं है। इसके अलावा डिवाइडर पर किया गया रंग-रोगन भी धुंधला पड़ गया है।
बदायूं रोड : अंधे डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट भी नहीं
शुक्रवार को चौबारी मेला शुरू हो गया है, इस रोड पर ट्रैफिक का दबाव भी अब पहले से काफी बढ़ गया है। मगर यहां डिवाइडर पर कोई रिफ्लेक्टर या संकेतक नहीं है। इसके अलावा इस रोड पर तमाम स्ट्रीट लाइटें भी चौपट हैं, इसके चलते खतरे की आशंका बनी हुई है। मगर जिम्मेदार अफसर बेफिक्र हैं और अब तक डिवाइडर की रंगाई-पुताई शुरू नहीं कराई है। कई जगह डिवाइडर क्षतिग्रस्त है।
शहर में फर्राटा भरते ट्रैक्टर-ट्राली तोड़ रहे डिवाइडर
डिवाइडर के सबसे बड़े दुश्मन शहर में बेतरतीब दौड़ते ट्रैक्टर-ट्राली हैं। लंबाई ज्यादा होने के चलते अक्सर सड़क पार करते समय ये टक्कर मारकर उन्हें क्षतिग्रस्त कर देते हैं लेकिन ट्रैफिक पुलिस या आरटीओ कभी भी इन पर कार्रवाई जहमत नहीं उठाते, जबकि कृषि कार्य के नाम पर खरीदे गए इन वाहनों का कामर्शियल उपयोग हो रहा है।

नगर निगम के जो भी रोड हैं, उनके डिवाइडर पर जल्दी ही रंग-रोगन कराने का काम शुरू कराया जाएगा। जो भी डिवाइडर क्षतिग्रस्त हैं, उनकी मरम्मत करा दी जाएगी। - संजय चौहान, एक्सईएन, नगर निगम
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