बरेली। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय में रिश्वत का खेल पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यहां रिश्वत ही रवायत बन गई है। कार्यालय के वरिष्ठ सहायक नवेद को एक छात्रा की मार्कशीट में मां का नाम ठीक करने के लिए 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा जा चुका है। इसके बाद से विभाग ने कार्यशैली में बदलाव के दावे किए। इन बदलावों से प्रमाणपत्र में संशोधन की प्रक्रिया का लाभ एक व्यक्ति को कितना मिल रहा है, इसका जायजा लेने बृहस्पतिवार दोपहर 12:03 बजे संवाद न्यूज एजेंसी की टीम कार्यालय पहुंची तो दावों की कलई खुल गई।
रुपये रखने से हो जाएगा काम...
बदायूं से कार्यालय पहुंचे तीन व्यक्तियों में से एक को मार्कशीट में संशोधन, दूसरे को बेटे का बोर्ड बदलने की वजह से 12वीं की सनद और तीसरे व्यक्ति को मार्कशीट खोने पर दोबारा बनवानी थी। तीनों ने बताया कि बार-बार जाने पर आधा घंटा इंतजार करने के लिए कह दिया जाता है। आसपास के लोगों ने कहा, कुछ रुपये फाइल में दबाकर रखने से काम हो जाएगा। इसके लिए वे तीनों 500 रुपये का नोट खुलवाने के लिए बाहर आए। डेढ़ बजे तक तीनों ने इंतजार किया। एक व्यक्ति को ढाई बजे मार्कशीट मिली। वहीं, दूसरे को अगली बार बुलाया है। उनका कहना है कि वे इंतजार नहीं करना चाहते इसलिए जुगाड़ की बात पता लगने की शिकायत नहीं की है।
वर्षों से काट रहे चक्कर
- एक साल पहले मैंने 10वीं की मार्कशीट में संशोधन के लिए आवेदन किया था। पहले दस्तावेज में कमी बताई गई। इसके लिए चार-पांच बार चक्कर काटे। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की। अब पता लगा कि जिले में स्कूल के माध्यम से मार्कशीट मिलेगी। - रिहान कादरी, शाहजहांपुर
- मैं यहां 12 बजे आया। संबंधित पटल के कर्मचारी ने मुझे कई बार इंतजार करने के लिए कहा। लेन-देन की बात थी लेकिन अंतत: काम हो गया। - रमन कुमार, बिजनौर
- भाई की मार्कशीट में पिता का नाम संशोधित कराना है। चार-पांच चक्कर काटे। ढाई घंटे इंतजार कर चुका हूं। अभी भी रुकने के लिए बोला है। - दानिश आलम, बरेली
- मैंने 2023 में 12वीं उत्तीर्ण की। दोनों मार्कशीट खो गईं। आवेदन पर एक मिली, दूसरी मार्कशीट का इंतजार कर रहा हूं। - मोहम्मद अयान, बदायूं
वर्जन,
2026 से पहले के लंबित तीन हजार प्रकरण निपटाए जा चुके हैं। शेष दो हजार का निस्तारण कराया जा रहा है। फाइल में रुपये रखने की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर कार्रवाई होगी। हालांकि, यह नहीं कहा जा सकता कि सबकुछ ठीक हो गया है। इंतजार से बचने के लिए लोगों को फोन कॉल करके ही कार्यालय आने की सलाह दी जाती है। जो लोग बिना कॉल किए पहुंचते हैं, वे परेशान होते हैं। कार्यालय में 275 कर्मचारियों की जगह 56 ही सभी अनुभाग संभालते हैं। इस कारण काम में समय लगता है। - रेखा दिवाकर, सचिव, क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय