बरेली। सर्द मौसम में दिल का दर्द मरीजों को दिल्ली की दौड़ लगवा रहा है। यहां जिला अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट की तैनाती नहीं। तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के तौर पर होना था, लेकिन यहां भी विशेषज्ञों का टोटा है। उपकरण धूल फांक रहे हैं। जिला अस्पताल पहुंच रहे हृदयरोगियों को लखनऊ रेफर किया जाता है, पर सुविधाओं के लिहाज से ज्यादातर लोग दिल्ली को तरजीह देते हैं। कार्डियक अरेस्ट के मामलों में कई बार इस भागदौड़ में मरीजों की जान सांसत में पड़ जाती है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राहुल बाजपेई के मुताबिक सर्दियों में हृदयरोगियों की तादाद बढ़ गई है। अस्पताल में न तो आईसीयू की व्यवस्था है, न ही कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती। इस वजह से मरीजों की जांच और इलाज नहीं हो पाता। उन्हें रेफर करना पड़ता है। अन्य बीमारियों की वजह से भर्ती हुए मरीज को भी अगर कार्डियक अरेस्ट की आशंका होती है तो उन्हें भी बगैर देरी किए हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो माह भर में इमरजेंसी में करीब चार सौ मरीजों का इलाज हुआ। इसमें हृदय संबंधी बीमारियों के 90 मरीज शामिल रहे। उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। इनमें कई कार्डियक अरेस्ट के मामले भी शामिल रहे।
मददगार बनी एएलएस एंबुलेंस
जिला अस्पताल में ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। रेफर मरीजों में कई हृदयरोगी भी होते हैं। उनके पास निजी अस्पताल के इलाज का खर्च उठाने की क्षमता नहीं होती। उनके लिए एंबुलेंस सेवा मददगार साबित हो रही। प्रोग्राम मैनेजर शिवम सोनी के मुताबिक कार्डियक अरेस्ट के रेफर मरीजों को एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस से हायर सेंटर पहुंचाते हैं, ताकि उनका जीवन सुरक्षित रहे।
डायबिटीज, बीपी के मरीज बीच में न छोड़ें दवा
जिला अस्पताल एनसीडी क्लीनिक प्रभारी डॉ. मयंक के मुताबिक उच्च रक्तचाप हृदयाघात की प्रमुख वजह है। इससे बचाव के लिए बीपी के मरीज दवा जारी रखें। सर्दियों में धमनियों के सिकुड़ने से शरीर में रक्त संचार के लिए दिल को काफी मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, डायबिटीज और हाइपरटेंशन की चपेट में रहे लोगों में रक्त का दबाव बढ़ने से हृदयाघात की आशंका रहती है। लिहाजा, सावधानी बरतनी चाहिए। अमर उजाला ब्यूरो