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यूपी: बेटे के जन्म पर बधाई में हजार रुपये नहीं दिए, तो दो घंटे बाद बेटी सौंपी

Wed, 04 Sep 2019 06:00 AM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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रुहेलखंड विवि परिसर में रिश्तेदार के घर आए शाहजहांपुर के परिवार ने जिला महिला अस्पताल में बच्चा बदलने का आरोप लगाया है। आरोप है कि पहले बेटे के जन्म की बात बताकर बधाई मांगी गई, हजार रुपये न देने पर दो घंटे बाद बेटी थमा दी गई। परिवार इसकी शिकायत करने बारादरी थाने पहुंचा तो उसे घटनास्थल कोतवाली बताकर वहां भेज दिया गया। वहां तहरीर दी गई है।
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शाहजहांपुर के थाना खुदागंज के गांव खेड़ा नवादा निवासी प्रदीप सिंह की पत्नी गुड्डन को प्रसव पीड़ा हुई तो वे उसे लेकर सोमवार शाम रुहेलखंड विवि परिसर में रहने वाले अपने चाचा छोटे सिंह के घर आए। छोटे सिंह विवि में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। मंगलवार सुबह आठ बजे गुड्डन को महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रदीप की मां गायत्री देवी के मुताबिक उन्हें स्टाफ ने बताया कि बच्चा नार्मल डिलीवरी से ही हो जाएगा। दोपहर में बड़ा ऑपरेशन करना मजबूरी बताया। परिवार ने हामी भर दी। गायत्री की मानें तो लेबर रूम के बाहर वे लोग बैठे हुए थे। नर्स कपड़े में लपेटकर एक बच्चा लाई और कहा कि बधाई हो, बेटा हुआ है। हजार रुपये दो, मिठाई खाएंगे। तब गायत्री ने परिवार को गरीब बताकर मजबूरी जताई।
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बराबर खड़े प्रदीप ने नर्स को दो सौ रुपये दे दिए और कपड़ा हटाकर बच्चा देखने की कोशिश की। तब नर्स यह कहकर तुनककर चली गई कि बच्चे को हवा लग जाएगी। गायत्री ने बताया कि शाम करीब साढ़े चार बजे जब उनकी समधिन बच्चे को कपड़े पहनाने अंदर गईं तो पता लगा कि वहां गुड्डन के पास बेटा नहीं बेटी लेटी हुई थी।

बच्चे के बजाय बच्ची मिलने से गुस्साए परिवार ने इस पर नाराजगी जताई। वहां मौजूद डॉक्टर और स्टाफ से भी इनकी बहस हुई। बाद में गायत्री और प्रदीप बारादरी थाने पहुंचे। वहां तहरीर देकर अस्पताल स्टाफ पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की।

वहां से इन्हें कोतवाली भेज दिया गया। तब ये लोग कोतवाली में तहरीर देकर चले आए। इंस्पेक्टर गीतेश कपिल ने बताया कि इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है, न ही ऐसी तहरीर दी गई है। ऐसा है तो जांच कराएंगे।

डीएनए टेस्ट कराने की मांग

गायत्री देवी ने आरोप लगाया कि नर्स ने एक हजार रुपये की मांग की थी। इसे वे पूरा नहीं कर सके तो बच्चा बदल दिया गया। अगर ये उनकी बेटी है तो पहले ही इस बारे में बता दिया जाता। दो घंटे बाद बताने की क्या जरूरत थी।  उन्होंने कहा कि वे लोग अस्पताल वालों की तरह निर्दयी नहीं हैं। बेटी को अपनी ही मानकर उसका पूरा ख्याल रख रहे हैं। बुधवार को बड़े अफसरों से मिलकर इसके डीएनए टेस्ट की मांग करेंगे। अगर बच्ची उनकी साबित हो जाएगी तो कोई बात नहीं, वर्ना अस्पताल स्टाफ पर कार्रवाई कराएंगे।

दो घंटे बाद आंख से पट्टी खोलने पर ऐतराज

 गुड्डन का कहना था कि ऑपरेशन के दौरान उनकी आंखों पर पट्टी बांधी गई। उनका शरीर सुन्न था पर पूरा होशोहवास था। इसमें डिलीवरी के तुरंत बाद उन्होंने स्टाफ की बातें सुनीं जिसमें बेटा होने का जिक्र था।

आमतौर पर ऑपरेशन होते ही पट्टी खोल दी जाती है पर उनके मामले में ऐसा नहीं हुआ। करीब दो घंटे बाद पट्टी खोली गई। तब उन्हें अपने पास बेटी मिली। उन्हें बेटी होने का अफसोस नहीं है पर अगर धोखा दिया गया है तो जांच होनी चाहिए।

स्टाफ बोला: पहली लिखापढ़ी के बाद करते हैं दूसरी डिलीवरी

जिला महिला अस्पताल में ऑपरेशन ड्यूटी पर डॉ. नीलम और निश्चेतक पदार्थ देने में डॉ. ललित की ड्यूटी थी। डॉ. ललित ने बताया कि अस्पताल में दोपहर के वक्त ऑपरेशन से चार डिलीवरी हुईं और चारों में ही बेटियां पैदा हुईं। वहीं, इस तरह के आरोप अक्सर लगते रहते हैं। इसलिए उन लोगों ने नियम बना रखा है कि जब एक बच्चा परिवार को लिखापढ़ी में रिसीव करा देते हैं तभी दूसरी महिला को डिलीवरी के लिए अंदर लिया जाता है।

महिला अस्पताल की सीएमएस अलका शर्मा ने बताया कि अस्पताल में डिलीवरी से जुड़ा सारा काम पारदर्शी है, बच्चा बदलने की कोई संभावना ही नहीं है। कैसी भी जांच करा ली जाए। वे जांच कराएंगी, अगर किसी स्टाफ ने मजाक में बेटे की बात कही होगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

पहले प्राइवेट अस्पताल में मचा था बच्चा बदलने का शोर

करीब दो महीने पहले शहर के प्रेमनगर थाना क्षेत्र के एक प्राइवेट अस्पताल में बच्चा बदलने को लेकर खासा हंगामा हुआ था। रामपुर जिले के दंपती ने एक अवयस्क शिशु को वहां इन्क्यूवेटर में रखवाया था। कुछ दिन बाद अस्पताल वालों ने उन्हें बच्ची थमाई तो वे बिगड़ गए।

उन्होंने बच्चे के पैदा होने वाले अस्पताल के कागजात दिखाए थे जिसमें मेल लिखा हुआ था। अस्पताल वालों का दावा था कि बच्ची ही भर्ती कराई गई थी जिसका शरीर अविकसित था। इससे शायद भ्रम हो गया था।

परिवार ने बच्ची लेने से इंकार कर दिया तो सीडब्लूसी के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. डीएन शर्मा ने एडी हेल्थ से प्रयास कराकर उसे शाहजहांपुर के सरकारी अस्पताल के बच्चा वार्ड में रखवाया। बच्ची वहां से पूर्ण स्वस्थ होकर बरेली की बार्न बेबी फोल्ड संस्था के सुपुर्द कर दी गई है। यहां भी परिवार डीएनए टेस्ट की मांग पर अड़ा हुआ था पर बाद में उससे भी पीछे हट गया।
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