बरेली। बच्चों की पहली शिक्षक और डॉक्टर मां ही होती है, लेकिन नवजात बच्चों को सेहतमंद बनाने में कारगर प्राचीन विधियों को भूलना बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिले में प्रीमेच्योर बेबी की संख्या बढ़ती जा रही है। इसे देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रीमेच्योर बेबी की मां को कंगारू मदर केयर (केएमसी) विधि के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप तैयार कर जागरूकता अभियान संचालित किया जाएगा।
ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप के दीनानाथ द्विवेदी ने बताया कि मां अपने नवजात बच्चे की पहली डॉक्टर बनकर उसे सेहतमंद रख सकती है। इसके लिए उसे कंगारू मदर केयर (केएमसी) से अपने बच्चे को हीलिंग टच देना होता है। इससे नवजात बच्चों के शरीर के तापमान में स्थिरता आती है। उन्हें ‘हाइपोथरमिया’ से बचाया जा सकता है। साथ ही उनका वजन भी बढ़ता है। बच्चा ठीक से स्तनपान करने लगता है। बच्चों का नींद में चौंकना भी केएमसी से दूर हो जाता है। इस विधि के प्रति जागरूकता लाने में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग इंक्रीमेंटल लर्निंग अप्रोच (आईएलए) के तहत ब्लॉक रिसोर्स ग्रुप को प्रशिक्षित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायतीराज विभाग, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अलावा टेक्निकल सपोर्ट यूनिट (यूपीटीएसयू) की पोषण सखी भी जागरूक करेंगी।
कौन-कैसे कर सकता है केएमसी
इसमें मां को अपने सीने से बच्चे का सीना लगाना होता है ताकि बच्चे और मां की त्वचा का स्पर्श हो सके। ये विधि मां को दिन में 3-4 बार एक-एक घंटे के लिए करनी होती है। मां के अलावा परिवार का कोई और सदस्य जैसे बच्चे के पिता, उसके दादा या कोई भी बच्चे को केएमसी दे सकता है। केएमसी में शिशु की मां को किसी कुर्सी पर बैठकर ऐसे कपड़े पहनने होंगे जो आगे से खुल सके। साथ ही बच्चे को टोपी, जुराब, नैप्पी और आगे से खुलने वाले कपड़े पहनाएं। इसके बाद बच्चे को मां के सीने पर पर सीधा रखें ताकि मां के साथ आई कांटैक्ट हो सके। बच्चा रोने लगे, असुविधाजनक महसूस करे या हाथ-पांव मारे तो यह केएमसी बंद करने का समय होता है।
बेवजह रुपया न करें बरबाद
डॉ. रचना ने बताया कि जन्म के दिन तीन स्थितियां देखकर शिशु के कमजोर होने का पता लगाता है। पहला, साढ़े आठ माह से पहले जन्म, दूसरा, दो किलोग्राम से कम वजन, तीसरा, स्तनपान न कर पाना कमजोरी के संकेत हैं। ऐसे बच्चों को संक्रमण से बचाते हुए उन्हें जीवित रखना काफी कठिन होता है। इलाज में अच्छा खासा रुपया भी खर्च होता है, जबकि इस स्थिति में केएमसी बेहद कारगर है। बच्चों के शरीर को गर्म रखने के लिए सूती कपड़े से कई पर्तों में लपेटकर रखना, शिशु को अपने शरीर से चिपका कर रखने, स्वच्छता रखने और शिशु का हाथ धोने के बाद उसे कपड़े से पोंछने के बजाय हवा में सूखने दें।