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क्यों मैडम! बीमार-निराश टीचर ही बची थी ताकत दिखाने को

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बरेली। घपले-घोटालों के तमाम आरोपों से घिरे बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने शुक्रवार को एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जिससे इंसानियत भी शर्मसार हो गई। नगर शिक्षा अधिकारी ने प्राइमरी स्कूल जसौली की कैंसर से जूझ रही एक शिक्षक को गैरहाजिर बताते हुए उसका वेतन रोक दिया। इस कार्रवाई से शिक्षक संगठन के पदाधिकारी गुस्से में हैं।
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पिछले साल जसोली प्राइमरी स्कूल में अटैच शिक्षक जरीन फातिमा कैंसर से जूझ रही हैं। उनकी हालत गंभीर है। बताया जाता है कि नगर शिक्षा अधिकारी देवेश राय ने जरीन का हाल ही में वेतन रोक दिया। इसके लिए बीएसए की अनुमति भी नहीं ली। शिक्षक नेता हरीश बाबू ने बताया कि बीएसए से मामले की शिकायत कर कैंसर पीड़िता के उत्पीड़न के मामले की जांच की मांग की है। बता दें कि शिक्षिका ने हफ्ते भर पहले एनएसए देवेश राय को पत्र लिखकर वेतन जारी न होने से इलाज में समस्या की जानकारी देेते हुए वेतन जारी करने की मांग की थी। इस पत्र का भी अब तक एनएसए ने कोई जवाब नहीं दिया है। एनएसए से संपर्क करने का प्रयास किया तो उनके फोन पर कॉल रिसीव नहीं हुई।
कैंसर पीड़ित शिक्षिका जरीन फातिमा की हालत को देखते हुए केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी एनएसए देवेश राय को पहले किए गए उसके स्थानांतरण का आदेश रद्द करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एनएसए ने बीएसए को पत्र लिखकर उसे वापस पुराने स्कूल में भेजने की संस्तुति की थी।
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