बरेली। भगवान विष्णु के जागने और चातुर्मास की समाप्ति का दिन देवोत्थान एकादशी इस बार दो नवंबर को मनाया जाएगा। इस एकादशी को देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार देवोत्थान एकादशी तिथि का आरंभ एक नवंबर (शनिवार) को सुबह 9:11 बजे से होगा। इस तिथि का समापन दो नवंबर (रविवार) को सुबह 7:31 बजे पर होगा। दरअसल एकादशी का व्रत पूजन उदया तिथि में किया जाता है, इसलिए यह पर्व दो नवंबर को मनाया जाएगा।
पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि देवोत्थान एकादशी इस बार त्रिस्पर्शा योग में मनाई जाएगी। त्रिस्पर्शा योग एक दुर्लभ संयोग है जब एक ही दिन में एकादशी, द्वादशी और रात्रि के अंतिम पहर में त्रयोदशी तिथि आती है। इसे पद्म पुराण में वर्णित एक विशेष योग बताया गया है।
देवोत्थान एकादशी को अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है, इस वजह से बड़ी संख्या में विवाह भी इसी दिन होते हैं। तुलसी-शालिग्राम विवाह भी कराया जाता है।
एकादशी के बाद 15 दिसंबर तक शादियों की खूब धूम रहेगी। 15 दिसंबर से खरमास शुरू होने के बाद मांगलिक कार्यों पर एक माह तक फिर रोक लग जाएगी। संवाद
विवाह मुहूर्त
नवंबर - 2,3,5,8,12,13,16,17,18,21,22,23,25,30,
दिसंबर 4,5,6 8,15