2016-17 में डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने बाराबंकी में जारी की थी 13 करोड़ रुपये की परफार्मेंस ग्रांट
बरेली। 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप वर्ष 2016-17 में मानक पूर्ण न करने वाली 46 ग्राम पंचायतों को बाराबंकी में तैनात रहे डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने करोड़ों रुपयों का बजट जारी कर दिया। प्रदेश के 31 जिलों से फर्जीवाड़ा और गबन की सूचनाएं मिलने पर विजिलेंस जांच में वह प्रथम दृष्टया दोषी मिले और अब डीपीआरओ समेत अन्य अफसरों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। हालांकि डीपीआरओ ने विजिलेंस की ओर से लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
साल 2016-17 में डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने 13 करोड़ तीन लाख 40,705 रुपये 46 ग्राम पंचायतों को दिए थे। शासन ने परफार्मेंस ग्रांट के तहत दिए गए बजट को खर्च करने पर पहले ही रोक लगाई गई थी। बावजूद इसके ज्यादातर ग्राम पंचायतों ने यह रकम खर्च कर डाली। विजिलेंस जांच में जब डीपीआरओ से बजट जारी करने का आधार और उसके डॉक्युमेंट आदि दिखाने को कहा गया तो डीपीआरओ तीन ग्राम पंचायतों का ही बजट दिखा सके। शेष 43 ग्राम पंचायतों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए विजिलेंस ने नोटिस भी दिया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। मामले पर विजिलेंस ने अब तत्कालीन डीपीआरओ रहे चंद्रिका प्रसाद समेत बाराबंकी के एडीओ पंचायत व सभी ग्राम पंचायत के सचिवों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा अधिसूचना, सेक्टर यूपी सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक अनिल कुमार यादव ने दर्ज करवाया है।
डीपीआरओ बोले- नियमानुसार दी गई ग्रांट
एफआईआर दर्ज होने के मामले पर डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सिर्फ तीन ग्राम पंचायतों को ही परफार्मेंस ग्रांट दी थी, जिसका पूरा रिकॉर्ड वह विजिलेंस को सौंप चुके हैं। इसके बाद फिर 43 ग्राम पंचायतों को ग्रांट दी गई, जिसके संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। इस बात का उनके पास सुबूत भी है। उन्होंने विजिलेंस की ओर से की गई कार्रवाई को खारिज किया है और आगामी जांच में दोषमुक्त होने की बात कही है।
जांच मेें बरेली पर भी कसेगा शिकंजा
जानकारी के मुताबिक, बरेली में करीब 175 ग्राम पंचायतों को करोड़ों रुपये की परफार्मेंस ग्रांट दी गई। वर्ष 2016-17 में तत्कालीन डीपीआरओ टीसी पांडेय ने विजिलेंस जांच में 123 पंचायतों का ही सत्यापन कराया था। शेष 52 ग्राम पंचायतों की जांच हुई तो बड़े पैमाने पर धांधली मिलने की आशंका है। क्योंकि कई ग्राम पंचायतें जो मानक को पूरा नहीं कर रही हैं, उनके अभिलेखों की सत्यता परखे बिना बजट दिया गया है।