बरेली। रक्षाबंधन पर घर जाने वालों की भीड़ बढ़ी तो शनिवार को रोडवेज बस अड्डे पर मारामारी का नजारा दिखा। बसों में चढ़ने के लिए यात्री धक्कामुक्की करते नजर आए। भीड़ का आलम यह था कि बस आते ही लोग उसके पीछे दौड़ने लगते थे। यात्रियों को बसों की कमी न हो इसके लिए रोडवेज ने बेड़े की सभी बसें रूटों पर उतार दीं, इसके बावजूद यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। रविवार को हालात और खराब हो सकते हैं।
शनिवार को देर शाम तक रोडवेज ने शहर के सेटेलाइट और पुराना बस अड्डे से 320 बसें संचालित कीं। इनमें से 178 बसें दिल्ली रूट पर रवाना की गईं। यात्रियों को परेशानी से बचाने के लिए स्टेशन इंचार्ज को यात्रियों की उपलब्धता के हिसाब से बसों के रूट में फेरबदल करने का अधिकार दे दिया गया। रोडवेज के तमाम इंतजामों के बावजूद यात्री गंतव्य की बस के लिए परेशान होते रहे। सबसे अधिक दिक्कत शाहजहांपुर, पीलीभीत, बीसलपुर, आंवला, बदायूं आदि के रूटों पर रही। छोटे रूटों पर सवारियों की संख्या अधिक होने के बावजूद रोडवेज ने बसों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की थी। छोटे रूटों पर भेजने के बजाय आधी से ज्यादा बसें दिल्ली रूट पर चलाई गईं। इस वजह से आसपास के शहरों को जाने वाले यात्री बस अड्डे पर भटकते दिखे। सीमित संख्या में चल रहीं ट्रेनें और महिलाओं के लिए रोडवेज में यात्रा फ्री होने की वजह से ज्यादातर लोगों ने रोडवेज बसों का ही सहारा लिया।
यात्रियों की भीड़ से टूटा सोशल डिस्टेंसिंग का नियम
कोरोना संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए रोडवेज ने कई नियम लागू किए हैं। इनमें सीटिंग क्षमता के हिसाब से ही बसों में सवारियां बैठाने और बिना मास्क वाले यात्रियों को यात्रा न करने देने का नियम शामिल है, लेकिन शनिवार को उमड़ी यात्रियों की भीड़ के चलते दोनों ही नियम टूट गए। बसों की कमी के चलते तमाम यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा। बिना मास्क लगाए यात्री बसों में बैठे नजर आए।
यात्रियों की सहूलियत के लिए बेड़े की सभी बसें ऑनरोड की गई हैं। यात्रियों को दिक्कत से बचाने के लिए जिस रूट पर ज्यादा सवारियां हों, वहां के लिए बस संचालित करने का अधिकार स्टेशन इंचार्ज को दे दिया गया है। त्योहार की वजह से भीड़ बढ़ी है। बसों की पर्याप्त उपलब्धता है। - आरके त्रिपाठी, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज