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बीस में शून्य, यह है स्वास्थ्य विभाग का रिपोर्ट कार्ड

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बरेली। स्वास्थ्य विभाग की कारगुजारी के चलते अबकी बार जिले समेत मंडल की रैंकिंग पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ा है। शासन द्वारा किए जा रहे विकास और निर्माण कार्यों के मूल्यांकन में स्वास्थ्य विभाग का रिपोर्ट कार्ड शून्य है। बीस अंकों के मूल्यांकन में स्वास्थ्य विभाग को जीरो नंबर हासिल हुए हैं। जिलाधिकारी ने सीएमओ से जवाब तलब कर भविष्य में किसी भी तरह की शिथिलता मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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डीएम नितीश कुमार की ओर से सीएमओ को जारी पत्र के मुताबिक, प्रदेश सरकार के कार्यक्रम समन्वयन विभाग की ओर से जिले में संचालित विकास कार्यक्रमों का मूल्यांकन और अनुश्रवण किया जाता है। इसमें बरेली समेत सभी जिले और मंडल की रैंकिंग तैयार की जाती है। प्रदेश के सभी जिलों में बरेली को नौ और मंडल की रैंकिंग में 12वीं रैंक मिली है। टॉप तीन जिलों में शामिल ना होने की वजह स्वास्थ्य विभाग की लचर प्रगति रही। पत्र में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग से संबंधित प्रपत्रों में कम प्रगति प्रदर्शित होने से जिले और मंडल की रैंकिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट शासन ने डी ग्रेड में दर्ज की है। डीएम ने बताया कि कम रैंक मिलने पर कमिश्नर आर रमेश कुमार ने भी नाराजगी जताई है। लिहाजा, स्वास्थ्य विभाग को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
चार विकास कार्यक्रम सभी का परिणाम शून्य
1- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड) कुल लाभार्थियों की संख्या के सापेक्ष बनाए गए गोल्डर कार्ड की कुल संख्या का प्रतिशत 24.39 रहा। पांच अंक के पूर्णांक में प्राप्तांक शून्य।
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2- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (उपचारित रोगी) योजना से आच्छादित कुल लाभार्थियों की संख्या के सापेक्ष 7.53 फीसदी मरीजों का इलाज हुआ है। पांच अंक के पूर्णांक में प्राप्तांक शून्य।
3- परिवार नियोजन कार्यक्रम के लिए मासिक समीक्षा प्रपत्र परिवार नियोजन के स्थायी, अस्थायी विधियों से महिला/पुरुष नसबंदी में 2.14 फीसदी प्रगति रिपोर्ट मिली है। पांच अंक के पूर्णांक में प्राप्तांक शून्य।
4- अधूरे निर्माण कार्यों की प्रगति निर्माण कार्यों की वित्तीय एवं भौतिकी प्रगति स्वीकृति निर्माण कार्यों की संख्या के सापेक्ष पूरे हुए कार्यों का प्रतिशत शून्य दर्ज हुआ है। पांच अंक के पूर्णांक में प्राप्तांक शून्य।
‘किसी भी विभाग की खराब प्रगति से जिले की रैंक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विकास कार्यक्रमों में खराब प्रगति मिलने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।’
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- नितीश कुमार, डीएम
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