मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में फर्जीवाड़ा पर सिर्फ अपात्रों को रिकवरी नोटिस देने पर उठ रहे हैं सवाल
बरेली। नवाबगंज के फाजिलपुर गांव की नाबालिग और नाती-पोते वाली ‘कन्याओं’ का सामूहिक विवाह करने के मामले का खुलासा होने के बाद अपात्रों को तो नोटिस जारी कर दिए गए, लेकिन सामूहिक विवाह कराने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। नियमानुसार सत्यापन करने वालों पर भी गाज गिरनी चाहिए।
14 नवंबर को नवाबगंज में 53 जोड़ों का सामूहिक विवाह कार्यक्रम संपन्न हुआ था। विभागीय सूत्रों ने बताया कि आयोजन से पहले आवेदनों का सत्यापन किया जाता है। नियमानुसार आवेदन समाज कल्याण विभाग सेे बीडीओ कार्यालय भेजे जाते हैं। यहां एडीओ समाज कल्याण और वीडीओ (पंचायत सचिव) सत्यापन करते हैं। सवाल है कि अगर अफसर मौके पर गए थे तो फिर नाबालिग और नाती-पोतों वाली में फर्क क्यों नहीं कर सके। या फिर अफसरों ने कार्यालय में बैठकर ही आवेदनों का सत्यापन कर दिया। बताया जाता है कि ग्राम पंचायतों में अफसरों के एजेंट भी सक्रिय होते हैं, जो गांव-गांव जाकर सत्यापन करते हैं और अफसर दफ्तरों में ही बैठे रहते हैं। लेकिन जब मामला खुला तो बीडीओ ने सिर्फ अपात्रों को ही रिकवरी नोटिस जारी कर दिए।
खानापूर्ति नहीं चाहिए पूरी कार्रवाई
शिकायतकर्ता भगवान का कहना है कि उन्होंने किसी रंजिश के तहत शिकायत नहीं की है, बल्कि वह मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं को पलीता लगाने वालों पर कार्रवाई चाहते हैं। कहा, नाबालिग कन्याओं का विवाह बाल विवाह अधिनियम की उल्लंघन कर किया गया। साथ ही, महज लाभ के चक्कर में शादी शुदा ने भी दोबारा अपने ही पति से शादी कर योजना को बट्टा लगाया। उन्होंने अपात्रों के साथ ही, सत्यापन में हुई लापरवाही पर भी कार्रवाई की मांग की है।
‘जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। सत्यापन के जिम्मेदार अफसर पर भी कार्रवाई की जाएगी।’
- सत्येंद्र कुमार, सीडीओ