ऑक्सीजन संकट के बीच रामपुर बाग स्थित नारायण अस्पताल में चार मरीजों ने रविवार को दम तोड़ दिया। गुस्साए तीमारदारों ने हंगामे के बीच ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने का आरोप लगाते हुए अस्पताल पर पथराव किया तो उसका स्टाफ भाग गया। तीमारदारों के आरोपों पर सफाई देने के लिए अस्पताल प्रशासन आगे नहीं आया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जरूर दावा किया गया कि चारों लोगों की मौत ऑक्सीजन की वजह से नहीं बल्कि कार्डियक अरेस्ट से हुई हैं।
नारायण अस्पताल में थोड़े ही अंतराल के बीच जान गंवाने वाले चारों मृतकों के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि दोपहर के वक्त अचानक अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बताया कि अस्पताल में ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म हो गया है। उनके कुछ सोच-समझ पाने से पहले ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर जिंदगी के लिए जूझ रहे उनके मरीजों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई। इसके बाद एक-एक कर चारों ने दम तोड़ दिया।
मृतकों में शामिल बीसलपुर (पीलीभीत) के आनंद कुमार सिंह को फेफड़ों में दिक्कत होने के बाद 16 अप्रैल को नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पत्नी सुमन के मुताबिक रविवार को अचानक छटपटाकर उनकी मौत हो गई। नवादा शेखान की बबली गुप्ता ने भी कुछ इसी तरह दम तोड़ा। दातागंज की एक महिला 21 अप्रैल को भर्ती हुई थीं। आनंद और बबली के साथ उनकी भी मौत हो गई।
रामपुर बाग में ही रहने वाले अधिवक्ता जगदीश स्वरूप भटनागर इस अस्पताल करीब दस दिनों से भर्ती थे। रविवार दोपहर उन्होंने भी अचानक दम तोड़ दिया। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इधर यह दावा... ऑक्सीजन की कमी नहीं कार्डियक अटैक से हुई मौत
एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने जिला सूचना विभाग के व्हाट्सअप ग्रुप पर एक ऑडियो टेप डालकर दावा किया कि जिले के किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है न ही किसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि नारायण अस्पताल में चारों मरीजों की मौत कार्डियक अटैक से हुई है।
ऑक्सीजन की आस में शिक्षिका की भी सांसें टूटीं
आलमपुर ब्लॉक में तैनात शिक्षिका नीतू सिंह की भी शनिवार को अचानक मौत हो गई। वह 20 अप्रैल से स्टेडियम रोड स्थित लीलावती अस्पताल में भर्ती थीं। पति अजय सिंह का आरोप है कि शनिवार को अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनके यहां ऑक्सीजन खत्म हो रही है लिहाजा वह मरीज को तीन सौ बेड अस्पताल ले जाएं। यह भी दावा किया कि उनकी वहां बात हो गई है। अजय ऑक्सीजन सपोर्ट पर नीतू को तीन सौ बेड अस्पताल ले गए लेकिन गेट पर ही ऑक्सीजन खत्म हो गई। जब तक अस्पताल से ऑक्सीजन मिलती, तब तक नीतू की मौत हो गई।