बरेली। आरामदायक सफर का दावा करने वाली डबल डेकर स्लीपर बसें बड़ा खतरा बन कर सड़कों पर दौड़ रही हैं। अमर उजाला की पड़ताल में बुधवार को स्लीपर बसों के संचालकों की मनमानी देखने को मिली। स्लीपर बसों में न यात्रियों की फिक्र दिखी और न सुरक्षा मानकों का पालन दिखा। इसके उलट आरटीओ, पुलिस और जीएसटी के अधिकारियों ने सब कुछ ठीक बताया।
मानसिक अस्पताल के पास खड़ी स्लीपर बसों में आपातकालीन द्वार के पास सामान ठूस कर रखा मिला। परिचालक ने दावा किया कि सामान यात्रियों के हैं, मगर यात्रियों ने उसके सामने ही सामान अपना होने से इन्कार कर दिया। परिचालक व्यापारियों के माल की ढुलाई कर रहे हैं। इमरजेंसी की स्थिति में यात्री आपातकालीन द्वार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, इस सवाल पर परिचालक इधर-उधर देखने लगा।
बसों की छत और नीचे डिकी में भी व्यापारियों का ही माल ई-रिक्शा से उतार कर रखा जा रहा था। बस की स्लीपर सीट दो यात्रियों के लिए होती है, मगर उन पर तीन से चार यात्री लेटे मिले। इस तरह से 30 सीटर स्लीपर बस में 50 से ज्यादा यात्री सवार थे। स्लीपर बसों में अग्निशमन यंत्र भी नहीं दिखे।
खुद ही बना लिया अड्डा : श्यामगंज पुल से मानसिक चिकित्सालय के गेट तक स्लीपर बसों के संचालकों ने खुद का बस अड्डा घोषित कर रखा है। इसी तरह बदायूं रोड पर बीडीए गेट के समीप भी स्लीपर बस संचालकों ने अड्डा जमा लिया है। इसके चलते रोजाना जाम भी लगता है। इन स्थानों से पुलिस और नगर निगम के अफसर रोजाना गुजरते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई की जहमत नहीं उठाता। ब्यूरो