त्याग पत्र में धर्मेंद्र कश्यप ने किया लिखा
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने पोस्ट में राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित करते हुए लिखा कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ वोटिंग करने और संगठन को कमजोर करने वाले नेताओं को प्रथम पंक्ति में स्थान दिया गया, जबकि पिछड़े और अति पिछड़े समाज को पार्टी में स्थान व सम्मान नहीं मिला। इसी से आहत होकर उन्होंने प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से त्यागपत्र देने की बात कही और इसे स्वीकार करने का अनुरोध किया।
मनाने की कोशिश हुई की नहीं?
इस घटनाक्रम के बीच भाजपा के ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरनलाल लोधी ने धर्मेंद्र कश्यप से मुलाकात भी की। हालांकि, उन्होंने इसे औपचारिक मुलाकात बताया। दोनों के बीच क्या बातचीत हुई और क्या इस्तीफे के मुद्दे पर कोई चर्चा हुई, इस बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी नेतृत्व की ओर से धर्मेंद्र कश्यप को मनाने या उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई पहल हुई है या नहीं।
'टाटा-बाय-बाय' के बाद सदस्यता छोड़ने का एलान
धर्मेंद्र कश्यप इससे पहले भी अपने ‘टाटा-बाय-बाय’ वाले बयान को लेकर चर्चा में रहे थे। अब सदस्यता छोड़ने के एलान ने उनके राजनीतिक रुख को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर इस्तीफे का एलान करने के बाद पार्टी की ओर से इसे स्वीकार किए जाने या आगे की कार्रवाई को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
इस बात पर होगी नजर
धर्मेंद्र कश्यप का यह कदम ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर संगठन में प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को लेकर उनकी नाराजगी सार्वजनिक हो गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा नेतृत्व उनके इस्तीफे पर क्या रुख अपनाता है और क्या उनकी नाराजगी दूर करने के लिए कोई औपचारिक पहल होती है।