मालगाड़ी में छिपकर जा रहे रामभक्तों पर हुआ था अत्याचार
शहर के मढ़ीनाथ निवासी सतीश यादव उन दिनों युवा थे। वह बजरंग दल के महानगर सह संयोजक और विद्यार्थी परिषद के मंत्री थे। सतीश बताते हैं कि कुंवर सुभाष पटेल का नेकपुर हाथीखाना आवास उन लोगों का गोपनीय केंद्र था। वहां से कारसेवकों को अयोध्या भेजने का इंतजाम किया जा रहा था। योजना के तहत नौ अक्तूबर को 22 युवाओं का दस्ता जंक्शन यार्ड से लखनऊ जाने वाली मालगाड़ी से निकला था। रेल कर्मचारियों से तय हो गया था कि लखनऊ से अयोध्या दूसरी मालगाड़ी में छिपाकर भेज दिया जाएगा पर सूचना लीक होने पर पुलिस ने सभी को मालगाड़ी से गिरफ्तार कर बर्बरता की। बरेली सेंट्रल जेल में 28 दिन रखने के बाद रिहा किया गया।
कारसेवकों पर गोली चली तो जेल में गरमाया माहौल
सतीश यादव ने बताया कि दो नवंबर को जब अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलने की घटना टीवी पर दिखाई गई तो वह लोग सेंट्रल जेल में थे। इससे जेल में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। बैरकों से जेल के अंदरूनी गेट तक आकर रामभक्तों ने प्रदर्शन और नारेबाजी की। पीएसी अंदर घुसी तो मामला और गरमा गया। तत्कालीन एडीएम सिटी मंजुल जोशी ने जेल में आकर उग्र बंदियों को बमुश्किल शांत कराया था।