बरेली के डीएम के साथ ही मंडलायुक्त की रिपोर्ट भी शासन को प्राप्त हो चुकी है। इस रिपोर्ट में एसएलएओ, तत्कालीन एसएलएओ के अलावा उनके कार्यालय में ही तैनात रहे दो लेखपाल और एक अमीन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के चौड़ीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले में दो भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) समेत पांच और कार्मिक शीघ्र ही निलंबित होंगे। मंडलायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने कार्रवाई की फाइल आगे बढ़ा दी है। इसके अलावा एसडीएम, तहसीलदार और उनके अधीन कार्यरत कानूनगो व लेखपाल की भूमिका का भी परीक्षण किया जा रहा है।
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बरेली-पीलीभीत-सितारगंज (एनएच-74) और बरेली-बदायूं रिंगरोड पर एनएचएआई और राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत से यह घपला हुआ था। प्रदेश सरकार ने हाल ही में इसकी जांच स्टेट एसआईटी को दे दी है। इस संबंध में बरेली के डीएम के साथ ही मंडलायुक्त की रिपोर्ट भी शासन को प्राप्त हो चुकी है।
इस रिपोर्ट में एसएलएओ, तत्कालीन एसएलएओ के अलावा उनके कार्यालय में ही तैनात रहे दो लेखपाल और एक अमीन को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इन पांचों को निलंबित करने का निर्णय ले लिया गया है।
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सूत्रों के मुताबिक, भू-उपयोग परिवर्तन का आदेश एसडीएम कोर्ट से किया गया था। इसलिए संबंधित एसडीएम और उनके अधीन काम करने वाले तहसीलदार, कानूनगो व लेखपाल पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के सात अधिकारी व कर्मचारी अब तक निलंबित किए जा चुके हैं।