खुसरो अस्पताल में गर्भपात के दौरान गर्भवती की मौत का मामला शासन तक पहुंच गया है। मंगलवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी आलोक कुमार ने डीएम पंकज कुमार से इस संबंध में जानकारी ली है और आगे कार्यवाही बढ़ाने को कहा है। वहीं डीएम ने जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपते हुए 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
फतेहगंज पश्चिमी के अगरास गांव के रहने वाले रामबाबू की पत्नी हीराकली तीन माह की गर्भवती थी। उसकी मौत के बाद पोस्टमार्टम में गर्भाश्य फटने का जिक्र है और भ्रूण न मिलने की बात सामने आई है। मंगलवार को सीएमओ डॉ. विजय यादव ने एसीएमओ डॉ. मनोज शुक्ला और डॉ. रमेश चंद्रा को खुसरो अस्पताल जांच को भेजा। टीम ने अस्पताल से सभी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। साथ ही खुसरो अस्पताल को नोटिस जारी किया है। तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले पर लखनऊ में नेशनल इंस्पेक्शन एंड मॉनीटरिंग कमेटी की डॉ. नीलम सिंह ने भी एडी आलोक कुमार से बात की है। जिसके बाद एमडी ने डीएम से जानकारी ली।
डॉक्टर नीलम तो पंजीकृत ही नहीं हैं
हीराकली की बीएसटी में इलाज करने वाली डॉक्टर का नाम नीलम कुशवाहा दर्ज है लेकिन खुसरो अस्पताल ने सीएमओ कार्यालय में अपने पंजीकरण के दौरान जो डॉक्टरों की सूची दी है उसमें डॉ. नीलम का जिक्र ही नहीं है। टीम ने इसका भी जवाब मांगा है।
मैंने सिटी मजिस्टेट्र को मामले की जांच सौंपी है। वह 15 दिन में रिपोर्ट करेंगे। पंकज यादव, डीएम
यह गंभीर मामला है। डीएम पंकज कुमार से इस संबंध में बात हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग इस मामले को हल्के में बिल्कुल न ले। गंभीरता से जांच को कहा गया है।
-आलोक कुमार, एमडी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, लखनऊ