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हर तरफ हड़ताल,दफ्तरों में हाय, हाय, जनता बेहाल

Wed, 21 Sep 2016 02:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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हड़ताल का दृश्य
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मंगलवार का दिन हड़तालियों के नाम रहा। तहसीलों में लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसिस्ट और आशा बहुओं की हड़ताल पहले से ही चल रही है और अब सरकारी कार्यालयों के वाहन चालक, निक ायों और पंचायतों के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पूरा सिस्टम ही फेल रहा। मंगलवार को कार्यालयों में अधिकारी बैठे, फरियादी पहुंचे लेकिन निचले स्तर पर काम करने वालों के हड़ताल पर रहने के कारण कोई काम नहीं हुआ। कलक्ट्रेट मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के बैनर तले राजस्व लिपिक  बुधवार को आंदोलन के लिए लखनऊ रवाना हो गए हैं।भविष्य में भी इनकी हड़ताल खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।   
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आंगनबाड़ी वर्करों ने साढ़े तीन घंटे कलेक्ट्रेट घेरा
आंगनबाड़ी वर्करों ने मंगलवार दोपहर कलेक्ट्रेट को दो घंटे तक घेरकर चक्का जाम कर दिया। सैकड़ों आंगनबाड़ी वर्करों और सहायिकाएं नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। पुलिस कर्मियों ने मेन गेट बंद करके सबको बाहर ही रोक लिया तो वे गेट के सामने का रोड जाम करके बैठ गईं। कड़ाके की धूप के बावजूद वे नारेबाजी करते हुए जमीं रहीं। मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर उन्होंने प्रदर्शन किया। वर्कर सिर पर सफेद रंग की टोपी पहनी हुई थीं, जिन पर लिखा था- मानदेय दो 18000 वरना मौत दे दो अखिलेश सरकार।
आांगनबाड़ी कर्मचारी की महासचिव पुष्पा शर्मा ने बताया कि जिले की सारी आंगनबाड़ी वर्कर लगातार हड़ताल पर करते हुए 14 सितंबर से शहर के सेठ दामोदर स्वरूप पार्क पर धरने दे रही हैं, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई तो सारी वर्कर दोपहर दो बजे धरने से जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट आ गईं। वे डीएम को ज्ञापन देने की मांग पर अड़ी रहीं। कोतवाल और अन्य पुलिस कर्मियों ने समझाकर ज्ञापन खुद को देने की बात कही, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि डीएम आएं और प्रमुख सचिव से वार्ता कराएं। डीएम ने संदेश भिजवाया कि 10 महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल आए और उससे उनकी मांगों के समर्थन में वार्ता होगी, लेकिन वह तैयार नहीं हुईं। शाम साढ़े पांच बजे तक डीएम नहीं पहुंचे तो बाद में सारी आंगनबाड़ी वर्कर खुद ही चली गईं। प्रदर्शन में शोभा, रीता सोनी, सविता गौड़ और रानी गंगवार आदि प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
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एक गुट ने खत्म की हड़ताल
बरेली। आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका वेलफेयर एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष ओमवती गंगवार ने मंगलवार को हड़ताल खत्म करने का एलान कर दिया। उन्होंने बताया कि लखनऊ में प्रदेश नेतृत्व से प्रमुख सचिव की वार्ता हो गई, जिसमें कार्यकत्री और सहायिकाओं को उत्तराखंड के समान साढ़े छह हजार रुपये मानदेय देने की सहमति बन गई है इसलिए हड़ताल खत्म करने का निर्णय ले लिया है। बुधवार से वर्कर पूर्व की भांति काम करेंगी।
फार्मेसिस्ट दवा काउंटर की चाबी लेकर चले गए
2500 मरीजाें को नहीं मिल सकी दवा 
मंगलवार को हड़ताल के नाम पर फार्मासिस्ट दवा काउंटर कक्ष की चाबी लेकर ही हड़ताल पर बैठ गए। इससे जिला अस्पताल प्रशासन के वैकल्पिक इंतजाम ध्वस्त हो गए। पूरा दिन मरीजाें को दवा नहीं मिल सकी। इसकी जानकारी सीएमओ को हुई तो उन्हाेंने एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया। इसके बाद फार्मासिस्टाें ने चाबी वापस की लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। कई मरीज बिना दवा के ही लौट गए। सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट, नर्सेज, लैब तकनीशियन, नेत्र और दंत सहायकों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। ओपीडी में नए पर्चे 1878 बने जबकि पुराने मरीज करीब 800 आए। 2500 से अधिक मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर कमरे में बैठे रहे लेकिन इनको दवा नहीं बंटी। सुबह 11 बजे सीएमओ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा फार्मासिस्टों के 5 को काम पर लगा दिया। इनकी मांग है कि वेतन विसंगतियां दूर की जाएं।
एक भी जांच नहीं हुई, वार्डों में तैनात रहीं एजेंसी की नर्सें
जिला अस्पताल की पैथालजी में छह कर्मी हैं। इनमें पांच हड़ताल में शामिल रहे, एक ने ड्यूटी की। इस दौरान किसी भी भर्ती रोगी और ओपीडी में आए रोगियों की खून जांच नहीं हो सकी। न ही किसी का सैंपल लिया गया। वार्डों में एजेंसी की 35 नर्सों ने जिम्मेदारी संभाली। आम दिनों में पांच नर्सें होती हैं, लेकिन हड़ताल के दौरान एक वार्ड में दो से तीन नर्सें रहीं।
एनएचएम कर्मियों के लौटने से सुधरी हालत 
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैनात संविदा कर्मियों ने प्रमुख सचिव से वार्ता के बाद हड़ताल समाप्ति का ऐलान किया। इससे थोड़ी स्थिति सुधरी। संविदा के करीब 250 फार्मासिस्ट, 20 एलटी और 250 नर्सों ने सीएचसी और पीएचसी पर काम देखा। जिलाध्यक्ष सत्येंद्र यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम की ड्यूटी भी संविदा कर्मियों से पूरी हुई।
नगर निगम में काम बंद 
कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सभी कर्मचारी नगर निगम में जमा हुए। इसमें जिला अस्पताल, नगर निगम, सिंचाई संघ, नलकूप, नहर, पीडब्ल्यूडी, नर्सेज संघ, राजकीय वाहन चालक संघ और डिप्लोमा फार्मासिस्ट के लोग थे। मोर्चा के अध्यक्ष गंगाराम गंगवार ने सभी लोगाें के साथ मिलकर विभागों में कामकाज बंद कराया। संयोजक जयपाल पटेल ने भी कर्मचारियों को शामिल होने की अपील की। इस दौरान कोई कामकाज विभागाें में नहीं हुआ। कर्मचारी नेता सतीश ऋषिवाल, मिशनपाल सिंह, मुशर्रत बेगम, ताहिर कमाल, बीसी यादव, केसी त्रिपाठी, नीरा लाल, राम नरेश सिंह, सोनिया मसीह, राजबाबू, एएच रिजवी, भगवान सिंह यादव व अन्य कई शामिल रहे।
हड़ताल पर डटे रहे लेखपाल
लेखपालों की हड़ताल ने तहसीलों का कामकाज ठप कर दिया है। जाति, आय, निवास और हैसियत प्रमाणपत्र नहीं बन रहे हैं। वारिसान भी दर्ज नहीं हो रहे हैं। किसानों को खसरा खतोनी की नकल भी नहीं मिल पा रही है। विधानसभा मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी नहीं हो पा रहा है। हर सप्ताह प्रशासन मतदाता मिड डे मील तथा अन्य योजनाओं का सत्यापन कराता रहा है लेकिन हड़ताल के कारण सब कुछ ठप पड़ा हुआ है। लेखपालों ने आज से एक दिन का क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है जो कि 24 सितंबर तक चलेगा।  पहले दिन जिलाध्यक्ष संजीव सिंह, जिला मंत्री तुलाराम, नरायनदास मिश्रा, बृह्मानंद शर्मा, रामनाथ सिंह, निर्दोष शर्मा, सुरेश बाबू सक्सेना, लाल बहादुर गंगवार, मो. नासिर, ओमकार सिंह व प्रवेन्द्र सिंह बैठे। जिलाध्यक्ष संजीव सिंह ने कहा कि लेखपाल दस वर्ष की सेवा के बाद चपरासी के बराबर वेतन प्राप्त करता है। सारे प्राथमिक स्तर के कार्य करने के बाद भी शासन की ओर से लेखपालों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। 
ये है मांग
2000 के स्थान पर 2800 रुपये पे बेंड हो। लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक का पद मिले। लेपटाप और कंप्यूटर मुहैया कराएं। मंडल के स्थान पर जिले में तैनाती की व्यवस्था रहे।
राजकीय वाहन चालकों का चक्का जाम 
राजकीय वाहन चालक महासंघ की जिला शाखा की ओर से राजकीय वाहन चालकों का चक्का जाम दूसरे दिन भी जारी रहा। पीडब्ल्यूडी कार्यालय परिसर में अख्तर अली की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि आंदोलन से जिलाधिकारी, एंबुलेंस सेवा, पल्स पोलियो व वैक्सीन वाहनों को आंदोलन से दूर रखा गया है। चक्का जाम के कारण सरकारी वाहन नहीं चले। जिला मंत्री हरिशंकर ने बताया कि 21 सितंबर को 11 बजे जिला बेसिक शिक्षाधिकारी के कार्यालय के सामने बैठक की जाएगी।
विकास भवन सहित कई दफ्तरों में हुआ काम
विकास भवन के दो दर्जन कार्यालयों में हड़ताल का असर नहीं दिखा। यहां पर काम काज पूर्व की भांति होता रहा। इसी तरह बीएसए, डीआईओएस, उद्योग, डूडा सहित तीन दर्जन कार्यालयों में काम ठीक ठाक होता रहा।
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