अंग्रेजी शासन काल में बनी ढकिया डैम। स्रोत: ग्रामीण
मीरगंज। अंग्रेजी शासन काल में बनी ढकिया डैम से सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते किसानों को नहर से सिंचाई के लिए लगभग 30 साल से पानी नहीं मिल रहा है। प्रतिवर्ष नहर की सफाई के नाम पर अधिकारियों द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन डैम के टूटे फाटकों को सही नहीं करा रहे हैं। अब डैम की खाली पड़ी जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा शुरू कर दिया है।
अंग्रेजी शासनकाल में किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए अंग्रेजों ने कुल्ली नदी पर ढकिया गांव के पास डैम का निर्माण कराया था। उसमें से एक नहर निकाली गई, जो सहोड़ा, बसई, सुल्तानपुर, दुनका आनंदपुर होते हुए जुन्हाई सहित लगभग सौ गांवों की हजारों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती थी, लेकिन 30 साल से डैम के फाटक टूटे पड़े हैं, जिसे कभी भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ठीक कराने के बारे में विचार नहीं किया, जबकि लोगों ने काफी शिकायतें भी की थीं, जिसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। लोगों ने जगह-जगह नहर की जमीन को काटकर अवैध कब्जे भी कर लिए हैं, लेकिन विभाग को इसकी सुध नहीं है।
दर्जनों बार पत्र लिखकर भेजा
किसान नेता एवं पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार ने अधिकारियों को दर्जनों से अधिक बार पत्र लिखकर उच्चाधिकारियों को भेजा, लेकिन वहां से कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी विभाग ढकिया डैम की मरम्मत कार्य कराकर उसके फाटक को सही करा दे तो क्षेत्र के लोगों को काफी सहूलियत होगी। कम लागत में अपनी फसलें पैदा कर सकेंगे।
100 गांवों के लोग वंचित
पूर्व में ढकिया डैम से निकली रुहेलखंड नहर किसानों को 12 महीनों सिंचाई के लिए पानी देती थी, लेकिन 30 साल से लगभग 100 गांवों के किसान इस सुविधा से वंचित हो गए।
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