पकड़े गए तीनों तस्कर और बरामद जाली नोट
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बरेली में 27 लाख के जाली नोटों के साथ पकड़े गए तस्करों के तार नेपाल से जुड़े हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान या नेपाल में जाली नोट बनाकर यहां भेजे जाते थे। जाली नोटों की तस्करी में दोनों मुख्य सरगना के फरार होने से अभी कई सवालों के जवाब फंस गए हैं। नेपाली तस्कर को पकड़ना भले ही, मुश्किल हो पर स्थानीय सफेदपोश अफसार अली की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगी हैं। इसके बाद धंधे की पूरी हकीकत सामने आ सकेगी।
एसटीएफ मेरठ इकाई काफी समय से सीमा पार से हो रही जाली नोटों की तस्करी पर इनपुट जुटा रही थी। बरेली यूनिट के साथ मिलकर टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। एसटीएप और थाना भोजीपुरा पुलिस ने नैनीताल रोड स्थित भैरपुर खजुरिया के पास बंद पड़े ईंट भट्ठे से 27 लाख के जाली नोटों के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में भैरपुरा निवासी सद्दाम पुत्र अफसार अली, पीलीभीत के हरवंश उर्फ सोनू व गुरनाम सिंह शामिल हैं। प्रकाश, सद्दाम का पिता अफसार व भैरपुरा का सचिन मौके से फरार हो गए।
नेपाल में एक फैक्टरी में काम करता था अफसार
आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को काफी जानकारियां मिली हैं। पता लगा है कि नेपाल का सुरेश और भोजीपुरा का अफसार अली नेपाल के पोखरा की एक फैक्टरी में काम करते थे। करीब डेढ़ साल पहले इन लोगों का जाली नोट के धंधे से जुड़ाव हुआ। इसके बाद अफसार गांव लौट आया। सुरेश उसे नेपाल से जाली नोट मुहैया कराता था। वह उसे खपाता था।
बताते हैं कि लोगों को एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देते वक्त भी होशियारी से ऊपर और नीचे असली नोट लगा लिए जाते थे। हालांकि ज्यादातर लोगों को यह पता होता था कि नोट असली नहीं हैं, लेकिन साल भर से वह नोट बेहिचक खपा रहा था।
कस्बे के आसपास इलाकों से लेकर दूसरे प्रांतों तक जाली नोटों की सप्लाई अफसार कर चुका था। टीम अभी यह पता नहीं कर सकी हैं कि नोट बनाए कहां जाते थे। हालांकि इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान या फिर नेपाल में जाली नोट बनाकर पीलीभीत के रास्ते यहां भेजे जाते थे।
कार पर भाजपा का झंडा लगाता था अफसार
अफसार के बारे में जानकारी मिल रही है कि वह साल भर में ही काफी मालदार हो गया था। उसने एक पुरानी कार खरीद ली थी। उस पर भाजपा का झंडा लगाता था। वह खुद को भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़ा बताता था, लेकिन टीम को इस बात के प्रमाण नहीं मिले कि वह वाकई किसी दल से जुड़ा था। माना जा रहा है कि आसपास के लोगों में रसूख कायम करने के लिए वह सत्तापक्ष के दल से अपना जुड़ाव बताता था।