बरेली। ठंड बढ़ने के साथ ही फाइलेरिया का प्रकोप बढ़ने लगता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को जागरूक करने और घर-घर जाकर जांच करने के लिए आशा और आंगनबाड़ी वर्कर्स समेत स्वास्थ्यकर्मियों की 3500 टीमों का गठन किया है। टीमें जल्द ही जिले के साढ़े आठ लाख घरों में सर्वे करेंगी और फाइलेरिया के लक्षणों की जांच करेंगी।
जिला मलेरिया अधिकार देशराज सिंह ने बताया कि डीआईए-2021 कार्यक्रम के तहत अल्बेंडाजोल डीईसी, आइवरमैक्टिन दवा का सेवन टीमों के माध्यम से ड्रग एडमिनिस्टेटर्स कराएंगे। ग्रामीण और नगरीय लक्षित जनसंख्या को ड्रग एडमिनिस्टेटर्स 3500 टीमों के माध्यम से लोगों को दवा की खुराक खिलाएंगे। टीमें 22 नवंबर से अभियान चलाएंगी।
फ ाइलेरिया के लक्षण
जिला मलेरिया अधिकारी देशराज सिंह ने बताया कि आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। हालांकि बुखार, बदन में खुजली, प्राइवेट पार्ट और उसके आसपास दर्द और सूजन की समस्या होती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाइड्रोसिल भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। चूंकि इस बीमारी में पैर सूजकर हाथी के पांव जैसे दिखने लगते हैं, इसलिए फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है, बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
ऐसे करें बचाव
- फ ाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आसपास साफ -सफ ाई रखें।
- पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
- सोते वक्त हाथों, पैरों और अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगाएं।
- हाथ या पैर में कहीं घाव हो तो उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फि र पानी सुखाकर दवा लगाएं।
फाइलेरिया दवा खिलाने में पार्षद बनें लोगों के मददगार
मेयर उमेश गौतम ने सोमवार को नगर निगम के सभागार में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार और सभी पार्षदों के साथ बैठक की। मेयर ने कहा कि 22 नवंबर से फाइलेरिया के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे में पार्षदों की जिम्मेदारी है कि वह यह तय करें उनके वार्ड में कोई भी दवा का सेवन करने से छूट न जाए। वार्ड में आने वाली टीमाें का सहयोग करें और सभी को दवा खिलवाएं। इस मौके पर स्टेट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर डॉ. अंबादास, डॉ. रवि तिवारी, शुभम रस्तोगी आदि मौजूद रहे।