बरेली। सप्ताह भर से तपा रही तेज धूप से डायरिया, वायरल और त्वचा रोग के साथ ही अब माइग्रेन के मरीजों की कतार निजी और सरकारी अस्पताल की ओपीडी में बढ़ गई है। चिकित्सकों के मुताबिक तेज धूप से शरीर में निर्जलीकरण होता है। रक्त संचार प्रभावित होने से माइग्रेन उभर रहा है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। जो चार से लेकर कुछ दिन तक रहता है। इसके साथ उल्टी, थकान का अहसास होता है। तेज रोशनी और तेज आवाज इस समस्या को और बढ़ाते हैं। गर्मियों में शरीर के निर्जलीकरण, तेज धूप में बाहर निकलने से आंखों पर तेज रोशनी पड़ती है। रात भी गर्म होने से नींद पूरी नहीं होती। जिससे माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है।
बताया कि सप्ताह भर पहले रोजाना में दो-तीन मरीज आ रहे थे, लेकिन अब रोजाना करीब 25 ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं।
माइग्रेन से बचने के लिए गर्मियों में भरपूर पानी पिएं, नींद पूरी करें, धूप में काला चश्मा लगाकर ही बाहर निकलें। सिर को टोपी या कपड़े से ढंककर रखें। बताया कि माइग्रेन दर्द होने पर शांत रहें। अंधेरे में आराम करें। दवा खाएं और पानी पिएं।
बच्चों के साथ अब बड़ों पर भी डायारिया का हमला
पारा के 40 डिग्री पार पहुंचने पर अब बच्चों के साथ उम्रदराज लोग भी डायरिया की चपेट में आने लगे हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक काम के सिलसिले में दिन भर धूप में आवाजाही करने, पानी कम पीने और खुले में रखे खाद्य पदार्थों का सेवन करने से उल्टी, दस्त की शिकायत होती है। व्यस्तता के चलते उचित इलाज के अभाव में डायरिया की चपेट में आते हैं।
बच्चा वार्ड में 33 बच्चे भर्ती
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में डायरिया के चपेट में आने वाले बच्चों की कतार थम नहीं रही। बृहस्पतिवार को इलाज से स्वस्थ हुए 11 बच्चों को डिस्चार्ज किया गया, जबकि 13 नए बीमार बच्चे भर्ती किए गए। शाम चार बजे तक वार्ड में 33 बच्चे भर्ती रहे। स्टाफ नर्स के मुताबिक भर्ती 33 बच्चों में से 27 डायरिया और छह तेज बुखार की चपेट में रहे। ब्यूरो