तीन युद्ध लड़े, सेना से मिला सम्मान पर प्रशासन नहीं सुनता
करगैना निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार बीडी शर्मा ने बताया कि उन्होंने 17 साल की उम्र में वे सेना में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। 1962 के युद्ध में टैंक ड्राइवर थे। 1965 में तोपखाना और 1971 में वायुसेना से अटैच थे। सेवा मेडल और रक्षा मेडल से सम्मानित हुए। बताया कि भूमाफिया ने फर्जी एफआईआर लिखवा दी। जान से मारने की कोशिश हुई। इंसाफ के लिए पुलिस प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं पर सुनवाई नहीं हो रही।
कारगिल युद्ध में पेट्रोलिंग से सेना के लिए बनाते थे रास्ता
पीलीभीत बाईपास निवासी सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन एससी गुप्ता ने बताया कि कारगिल युद्ध में उन्हें श्रीनगर 970 सेक्शन कमांड का जिम्मा मिला था। इंजीनियर्स प्लाटून ओल्ड एयरफील्ड में रात 12 बजे पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसमें लैंड माइंस खोजकर उन्हें निष्क्रिय कराना और फिर पीछे से आ रही सेना को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराने के दौरान रामवन में बमबारी हुई थी। पर सेना ने तत्काल इसे नियंत्रित किया था।