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बरेली - मुरादाबाद रेंज में खंगाली जाएगी शराब की हरेक दुकान

Thu, 09 Jul 2020 02:08 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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फाइल फोटो - फोटो : demo photo
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रामपुर में सिपाही से लेकर कप्तान तक हरेक की भूमिका की जांच शुरू, ज्वाइंट कमिश्नर ने भी तलब की रिपोर्ट
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समानांतर बोटलिंग कर रहा था शराब सिंडिकेट, सरकारी दुकानों से हो रही थी बिक्री
शराब की दुकानों पर बगैर क्यूआर कोड की बोतलों को तलाश करेंगी टीम

बरेली। बरेली जोन में शराब सिंडिकेट डिस्टलरी के समानांतर शराब की बोटलिंग करने में लगा था। बाद में इन बोटलों को शराब की सरकारी दुकानों पर असली बोतलों के बीच मिलाकर बेचा जाता था। फर्क सिर्फ इतना होता था कि इन बोतलों पर क्यूआर कोड नहीं होता है। एसटीएफ की तहकीकात में इस बात का खुलासा होने के बाद बरेली और मुरादाबाद रेंज के सभी जिलों में शराब की दुकानों की जांच शुरू कर दी गई है। दुकानों पर बगैर क्यूआर कोड वाली शराब की बोतलों को तलाश करने का अभियान शुरू किया गया है। पठानकोट से पहुंचे एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) की 25000 लीटर की खेप एसटीएफ ने रामपुर के शहजाद नगर थाना क्षेत्र के धमौरा से पकड़ी थी। एडीजी कानून व्यवस्था की तल्ख चिट्ठी के बाद प्रकरण में सिपाही से लेकर एसपी रामपुर तक की भूमिका की जांच के आदेश दिए गए हैं। ज्वाइंट कमिश्नर आबकारी राजेश मणि त्रिपाठी ने मुरादाबाद - बरेली मंडल के डीसी से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
संयुक्त आबकारी आयुक्त ने बरेली और मुरादाबाद मंडल के डीसी को आदेश दिया है कि एसटीएफ ने जो जानकारियां दी हैं उनके आधार पर दोनों मंडलों में शराब की हरेक दुकान को चेक किया जाए। बगैर क्यूआर कोड वाली बोतलों को सर्च करके कार्रवाई की जाए। विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्तता की जांच के आदेश भी संयुक्त आयुक्त ने दिए हैं। एडीजी कानून व्यवस्था के आदेश के बाद पुलिस महकमा पहले से ही इस पर अभियान चला रहा है। मुरादाबाद रेंज में पुलिस, मजिस्ट्रेट और आबकारी अधिकारी की संयुक्त टीम गठित की गई है तो बरेली रेंज में पुलिस की ओर से अभियान शुरू किया गया है। टीमों को आदेश दिए गए हैं कि बोतल के क्यूआरकोड को स्कैन करके उसकी हिस्ट्री पता करें कि वह कहां से लाई र्गई है और किस दुकान को आवंटित हुई है।
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इस बीच पुलिस विभाग प्रकरण में अलग से एक आंतरिक जांच शुरू कर दी है। एडीजी अविनाश चंद्र का कहना है कि मामले में आईजी मुरादाबाद स्तर से जांच कराई जा रही है। दरअसल रामपुर में शहजाद नगर के भमौरा में जहां ईएनए को पठानकोट से लाकर स्टोर किया जाता था वहां कुछ दागी पुलिस वालों के नाम गोपनीय जांच में अफसरों के सामने आए हैं। चौकी इंचार्ज भमौरा से लेकर इंस्पेक्टर शहजाद नगर के खिलाफ पूर्व में कई बार गंभीर आरोप लगे हैं। इंस्पेक्टर के खिलाफ पूर्व में मुकदमा दर्ज होने की बात भी अधिकारियों को पता चली है। मामले में स्थानीय पुलिस की संदिग्ध भूमिका के चलते ही एसटीएफ ने इतनी बड़ी कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लगने दी थी।
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हमने बरेली और मुरादाबाद के डीसी को आदेश दिया है कि एसटीएफ की जानकारियों के आधार पर दोनों मंडलों में विस्तृत अभियान चलाएं। सप्ताहभर के भीतर शराब की हरेक दुकान को चेक करके रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए हैं। बगैर क्यूआर कोड वाली बोतलों को अभियान में तलाश किया जाएगा। इस खेल में जो भी विभागीय अधिकारी शामिल होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। - राजेश मणि त्रिपाठी, संयुक्त आयुक्त आबकारी।

एडीजी की फटकार के बाद भी दागियों पर एक्शन नहीं

बरेली। पुलिस महकमे में दागियों को संरक्षण देने का मामला अकेले कानपुर तक नहीं सिमटा है। कमोबेश यही हाल सभी जगहों का है। बरेली जोन में तस्करी कर ईएनए लाने के बाद शराब की अवैध बोटलिंग व बिक्री के मामले में एसटीएफ कुछ पुलिस अधिकारियों व आबकारी के लोगों के बारे में आला अफसरों को सटीक सूचनाएं दे चुकी है। इसके बाद अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था प्रशांत कुमार भी तल्ख चिट्ठी भेजकर पुलिस और आबकारी विभाग के स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत की बात कह चुके हैं। बावजूद इसके दागियों पर कार्रवाई करने में अफसर झिझक रहे हैं। एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि शहजाद नगर के भमौरा में पठानकोट से ईएनए के कंटेनर लगातार लाए जाते थे और यहां एक गोदाम से ड्रमों में भरकर उनको मिलावटी शराब बनाने के लिए बरेली व अन्य आसपास के जिलों में ले जाया जाता था।
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