राज्यकर्मियों की मिली थी 35 रुपये तक की राहत
20 मार्च 1972 को पेश हुए बजट में राज्यकर्मियों को उस समय 35 रुपये तक की राहत मिली थी। 85 रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाले को पांच रुपये, 86 से 209 रुपये तक वेतन पाने वालों को 15 रुपये, 210 से 499 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मियों को 20 रुपये और 500 से 1200 रुपये तक वेतन पाने वाले कर्मियों को 35 रुपये तक की राहत दी गई थी। सरकार ने उस समय यह वेतन आयोग की सिफारिश पर किया था। वित्तमंत्री ने कहा था कि यह राहत देने से राज्यकोष पर 15.70 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
नए करों की घोषणा नहीं हुई, फिर भी हुई वसूली
वित्तमंत्री ने उस समय नए करों की घोषणा नहीं की थी, मगर इसके बावजूद नए कर लागू हुए थे। यानी कह सकते हैं कि घुमा कर कान पकड़ा गया। जैसे घाटे की पूर्ति के लिए नए शुल्क लागू किए गए थे। ग्रामीण विकास कोष में छह करोड़ रुपये की वृद्धि कर दी गई थी। शराब की दुकानों की नीलामी से 50 लाख रुपये जुटाए गए थे। छह करोड़ रुपये राजस्व वसूली के लिए कड़े कदम उठाए गए थे।