जिले के सात सौ गांवों में पुरानी लाइनें हटाकर बिछाई जानी है एबीसी, कंक्रीट का बेस बनाए बगैर खड़े किए जा रहे हैं खंभे
ठेकेदारों और इंजीनियरों की साठगांठ से हो रहा है बड़े पैमाने पर घपला
एक हजार से अधिक आबादी वाले सभी गांवों में बदली जानी है लाइन
बरेली। कहने को सरकार करोड़ों की लागत से गांवों में बिजली की पुरानी लाइनों को बदलवा रही है लेकिन हो सकता है कि कभी एक आंधी आए और जिले के सैकड़ों गांवों में बिजली सप्लाई का पूरा सिस्टम ही एक झटके में धराशायी हो जाए। पुरानी लाइनों को हटाकर उनकी जगह एरियल बंच कंडक्टर डालने के काम में किए जा रहे घपले यही आशंका जता रहे हैं। खंभों को बगैर ग्राउटिंग खड़ा किया जा रहा है, केबल को भी अर्थिंग और सैगिंग लगाया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र में बिजली सप्लाई का नेटवर्क सुदृढ़ करने के लिए हाल ही में बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई है जिसके तहत तारों की पुरानी लाइनों को हटाकर उसकी जगह एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) बिछाया जा रहा है। शासन ने इसके लिए एनसीसी नाम की एजेंसी को अधिकृत किया है। बरेली जिले में इस एजेंसी को एक हजार से अधिक आबादी वाले करीब 700 गांव में लाइन बदलनी है। एजेंसी जिले में दो महीने पहले काम शुरू कर चुकी है। फिलहाल करीब 30 गांवों में काम चल रहा है।
तमाम और परियोजनाओं की तरह इस परियोजना पर भी ‘खाओ और खाने दो’ के सरकारी ढर्रे पर काम चल रहा है। एजेंसी गांवों में ग्राउटिंग के बगैर ही पोल खड़े कर उन पर एबीसी लगा रही है। ग्राउटिंग बिजली के खंभों के कंक्रीट बेस को कहते हैं। जिस गड्ढे में पोल लगाया जाता है, उसे कंक्रीट से भरा जाता है ताकि वह किसी तरफ झुके नहीं और तेज हवा में भी स्थिर रहे। ग्राउटिंग के बगैर खंभे लगाए जाने से साफ है कि जब भी तेज आंधी आएगी, ये खंभे बिजली की लाइनों समेत धराशायी हो जाएंगे। (संवाद)
गड़बड़ियां बेशुमार, काम की भी धीमी रफ्तार
ग्राउटिंग तो नहीं की जा रही है, इसके साथ अर्थिंग, एबी केबल की सैंगिंग, परिवर्तकों से एबी केबल को जोड़ने के लिए लग और दूसरी सामग्री का प्रयोग भी नहीं किया जा रहा है। महकमे के ही जानकार लोगों का कहना है कि इस वजह से एबीसी के जोड़ ढीले रह जाएंगे और इससे केबल के साथ कभी भी ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। जिन गांवों में एबीसी बिछाने का काम शुरू हुआ है, अधिकांश स्थानों पर यह गड़बड़ी की गई है। काम की रफ्तार भी काफी धीमी है। छह महीने में यह काम पूरा करने का लक्ष्य है लेकिन अब तक सिर्फ 30 गांव में ही काम शुरू किया गया है लिहाजा उसके समय से पूरा होने की भी उम्मीद नहीं है।
कई जगह तिरछे होने लगे पोल
मानक पूरे किए बिना लगाए गए पोल अभी से मुसीबत बनने लगे हैं। बिना ग्राउटिंग लगाए गए पोल केबल के खिंचाव से गिर न जाएं, इसलिए केबल को ढीला डाला गया है। केबल खिंचाव न होने से कई जगह झूलने लगी है। फरीदपुर के गांव कुआंडांडा, ढकनी समेत कई जगह पोल टेढ़े हो गए हैं। आंधी-तूफान आने पर कभी भी यह पोल गिर सकते हैं। ऐसे में इन गांवों में लंबे समय तक बिजली की सप्लाई बंद होना तय है। इससे जान-माल के नुकसान की भी आशंका है।
अफसरों की निगरानी में दिलचस्पी नहीं
प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही पावर कॉरपोरेशन के जेई और एसडीओ को अपने क्षेत्र में काम निगरानी में काम की शुरुआत कराने के निर्देश दिए गए थे मगर उन्होंने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ली। निगरानी न होने की वजह से एजेंसी पूरी तरह मनमानी से काम कर रही है।
हर पोल पर एक हजार का घपला
पावर कॉरपोरेशन के कुछ अभियंताओं के मुताबिक एक पोल की ठीक तरह ग्राउटिंग और दूसरे काम करने पर एक हजार से ज्यादा का खर्च आता है। मुख्यालय से इसके लिए मूल्य भी तय किया गया है। ग्राउंटिंग न करके एजेंसी हर पोल पर एक हजार रुपये का सीधा घपला कर रही है। कुछ पोल की ग्राउटिंग की गई है, लेकिन जांच में वह भी मानक के अनुरूप नहीं पाई गई।
ग्रामीण क्षेत्र के अधीक्षण अभियंता के साथ स्थानीय अफसरों को भेजकर काम की जांच कराई गई जिसमें काम मानक के अनुरूप नहीं पाया गया है। रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी। ग्राउटिंग, अर्थिग समेत दूसरे काम पूरे करने के निर्देश एजेंसी को दिए गए हैं।- संजय जैन, मुख्य अभियंता