दोनों के चुनावी कार्यक्रम सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल उन स्थानों पर लगा रहे हैं, जहां मुस्लिमों की बहुलता है। सपा के प्रदेश महासचिव आशीष चौबे का कहना है कि मुस्लिम मतों में बिखराव नहीं होगा, क्योंकि बसपा को वोट देने का मतलब भाजपा को फायदा पहुंचाना है।
सवर्ण और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं में पैठ बनाना चुनौती
मुस्लिम खां को उम्मीदवार बनाने से बसपा मुस्लिम मतों में हिस्सेदारी होने की उम्मीद है, लेकिन सवर्ण और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं में पैठ बनाना उसके लिए चुनौती है। बसपा जिलाध्यक्ष आरपी त्यागी कहते हैं कि बसपा हर वर्ग को जोड़ने के लिए भाईचारा कमेटियों का पहले ही गठन कर चुकी है। कमेटियों के जरिए ही सवर्ण और पिछड़ों के मत हासिल किए जाएंगे। अनुसूचित जाति के साथ मुस्लिम मतों को जुड़ाव बसपा की मजबूती का आधार है। जातिगत समीकरण साधकर ही बसपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उम्मीदवार उतारे हैं।
अनुसूचित जाति के मतों को साधने में जुटी भाजपा
मोदी की गारंटी और हिंदुत्व को धार देकर चुनाव मैदान में उतरी भाजपा ने स्थानीय स्तर पर जातिगत समीकरणों को साधा है। पिछली बार भाजपा के टिकट पर संघमित्रा मौर्य चुनाव जीतीं थीं। अबकी बार इसी बिरादरी के दुर्विजय सिंह को उतारा गया है। शाक्य-मौर्य पिछड़ा वर्ग में आते हैं।
पिछड़ी के साथ सवर्ण मतदाताओं का झुकाव जहां भाजपा की मजबूती का आधार बताया जा रहा है, वहीं पार्टी के चुनावी रणनीतिकारों ने अनुसूचित जाति वर्ग के मतों को साधने के लिए बिसौली के सपा विधायक आशुतोष मौर्या की पत्नी और बहन को पार्टी में शामिल किया है। अनुसूचित जाति के कुछ और असरदार नेताओं को भाजपा में शामिल करने की तैयारी चल रही है।