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जिंदगी की जंग हार गई बिटिया: बेबसी तो दिए...बदनामी के खौफ ने सिल दिए थे घरवालों के होंठ, छेड़छाड़ से थी परेशान

Mon, 08 Aug 2022 01:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

बरेली जिले के बिथरी चैनपुर में अनुसूचित जाति वर्ग की 13 वर्षीय कक्षा आठ की छात्रा छेड़छाड़ से तंग आकर फंदे पर लटक गई। इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गई। पीड़िता की मां ने बताया कि बिटिया ने आरोपी अमित पटेल के सरेराह छेड़छाड़ करने की कई बार शिकायत की, लेकिन उसके दबंग परिवार से होने की वजह और बदनामी के डर से वह खामोश रहीं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेबसी तो दिए... बेटी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी, लेकिन माता-पिता बदनामी के डर से अपने होंठ सिले रहा। चाहते तो थे कि बेटी को मौत के मुंह में धकेलने वाले शोहदे को सबक सिखाएं, लेकिन लाडली पर उंगली उठने की कीमत पर नहीं। तीन दिन की जद्दोजहद के बाद भी जब बेटी की जान नहीं बच पाई तो परिवार बिटिया को इंसाफ दिलाने के लिए आगे आया। 
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परिवार की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बिथरी चैनपुर में अनुसूचित जाति वर्ग की 13 वर्षीय कक्षा आठ की छात्रा छेड़छाड़ से तंग आकर फंदे पर लटक गई थी। गंभीर हालत में परिवार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शनिवार को उसकी मौत हो गई। 

बकौल मां, बिटिया ने आरोपी अमित पटेल के सरेराह छेड़छाड़ करने की कई बार शिकायत की, लेकिन उसके दबंग परिवार से होने की वजह और बदनामी के डर से वह खामोश रहीं। बिटिया को ही समझा देती थीं कि रास्ता बदल लिया करो। बुधवार को जब अमित ने सरेआम बिटिया से छेड़छाड़ की तो वह इसे बर्दाश्त न कर सकी। उसने पिता से शिकायत भी की, लेकिन उलटा वह उसी को समझाने लगे।
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बिटिया की मौत ने माता-पिता को झकझोर दिया है। अब वे किसी भी कीमत पर आरोपी को सजा दिलाने के लिए हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। इस मामले में सीओ तृतीय साद मियां खां का कहना है कि मामले की जानकारी छात्रा की मौत होने के बाद परिवार ने दी है। रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जांच में जो भी तथ्य और
साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अचानक कांपने लगती थी बिटिया

मां ने बताया कि अमित पटेल रास्ते में बिटिया से छेड़छाड़ करता था। विरोध करने पर माता-पिता के साथ उसे भी जान से मारने की धमकी देता था। इससे बिटिया घर में हर वक्त डरी सहमी रहती थी। अपने आप से बात करने लगती थी और फिर कांप जाती थी। काफी-काफी देर तक रोती रहती थी। मां-पिता उसे समझाते थे कि न डरे। सब लोग उसके साथ हैं, लेकिन बिटिया यूं साथ छोड़ जाएगी, यह नहीं सोचा था।

कार्रवाई न कराना पड़ गया भारी
छात्रा ने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया था, लेकिन इसके बाद भी वे बदनामी के डर से खामोश रहे। अमित के खिलाफ कार्रवाई से मुंह मोड़े रहे। अगर घर वाले आरोपी अमित पटेल के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करा देते तो शायद बिटिया की जान बच जाती।

ऐसे मामलों को न छुपाएं, पुलिस की लें मदद
सीओ प्रथम श्वेता यादव ने कहा कि बच्चों के दिमाग में डर बैठना ही उनकी जान का दुश्मन बन जाता है। बच्चों की बात को गंभीरता से सुनें और उन्हें खुशनुमा माहौल दें। अगर उनके साथ कुछ गलत हो रहा है तो छुपाएं नहीं सीधे पुलिस से संपर्क कर मामले की शिकायत करें। ऐसा करने पर हो सकता है आगे होने वाली बड़ी घटना टल जाए।
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