मां ने बताया कि अमित पटेल रास्ते में बिटिया से छेड़छाड़ करता था। विरोध करने पर माता-पिता के साथ उसे भी जान से मारने की धमकी देता था। इससे बिटिया घर में हर वक्त डरी सहमी रहती थी। अपने आप से बात करने लगती थी और फिर कांप जाती थी। काफी-काफी देर तक रोती रहती थी। मां-पिता उसे समझाते थे कि न डरे। सब लोग उसके साथ हैं, लेकिन बिटिया यूं साथ छोड़ जाएगी, यह नहीं सोचा था।
कार्रवाई न कराना पड़ गया भारी
छात्रा ने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया था, लेकिन इसके बाद भी वे बदनामी के डर से खामोश रहे। अमित के खिलाफ कार्रवाई से मुंह मोड़े रहे। अगर घर वाले आरोपी अमित पटेल के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करा देते तो शायद बिटिया की जान बच जाती।
ऐसे मामलों को न छुपाएं, पुलिस की लें मदद
सीओ प्रथम श्वेता यादव ने कहा कि बच्चों के दिमाग में डर बैठना ही उनकी जान का दुश्मन बन जाता है। बच्चों की बात को गंभीरता से सुनें और उन्हें खुशनुमा माहौल दें। अगर उनके साथ कुछ गलत हो रहा है तो छुपाएं नहीं सीधे पुलिस से संपर्क कर मामले की शिकायत करें। ऐसा करने पर हो सकता है आगे होने वाली बड़ी घटना टल जाए।