बरेली। डीएम और कमिश्नर के स्तर पर बरेली कॉलेज के प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन का अधिकार खारिज किए जाने के बाद कॉलेज प्रबंधन वरिष्ठतम शिक्षक और उप प्राचार्य डॉ. पूर्णिमा अनिल का इस कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता रोकने की जद्दोजहद में जुट गया है। उधर, कमिश्नर के आदेश पर डीएम ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। आसार इसी हफ्ते डॉ. अनुराग को कुर्सी से हटाए जाने के बन रहे हैं। ऐसी स्थिति में प्रबंधन किसी और शिक्षक का नाम प्राचार्य पद के दावेदार के तौर पर आगे बढ़ा सकता है।
बरेली कॉलेज के निवर्तमान प्राचार्य डॉ. अजय कुमार शर्मा को 14 अक्तूबर को रिटायर होना था लेकिन प्रबंधन ने पांच अक्तूबर को ही उनसे प्राचार्य पद का कार्यभार डॉ. अनुराग मोहन को दिलाकर कॉलेज का नया प्राचार्य बना दिया था। इसके बाद कॉलेज में वरिष्ठता का विवाद शुरू हो गया। उप प्राचार्य डॉ. पूर्णिमा अनिल ने डॉ. अजय कुमार शर्मा के बाद खुद को सबसे वरिष्ठ बताते हुए प्राचार्य पद पर दावा किया था और इस बारे में बोर्ड ऑफ कंट्रोल के पदेन अध्यक्ष कमिश्नर रणवीर प्रसाद, प्रबंध समिति के पदेन अध्यक्ष तत्कालीन डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह, कुलपति प्रो, अनिल शुक्ल और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. राजेश प्रकाश को प्रत्यावेदन दिया था। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह डॉ. अनुराग की नियुक्ति अवैध बताते हुए कमिश्नर को रिपोर्ट दे गए थे। कमिश्नर भी नए डीएम को प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर नए प्राचार्य का चयन करने का आदेश दे चुके हैं।
इस बीच डॉ. अनुराग को प्राचार्य बनाने वाले प्रबंध समिति के सचिव ने पदेन अध्यक्ष के तौर पर डीएम के निर्णय पर भी सवाल उठाया है। हालांकि डीएम के स्तर पर जल्द ही इस मामले में कार्रवाई करने की संभावना जताई जा रही है। डीएम नितीश कुमार ने बताया कि अयोध्या प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और फिर बारावफात में व्यस्तता की वजह से वह अभी बरेली कॉलेज की रिपोर्ट नहीं देख पाए। जल्द ही रिपोर्ट देखने के बाद उसके मुताबिक आगे कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने कहा कि प्राचार्य का चयन अगर गलत हुआ है तो उनको हटाया जाएगा।
नया नाम ला सकता है प्रबंधन आज खास शिक्षकों की बैठक
सूत्रों के मुताबिक बरेली कॉलेज में डॉ. पूर्णिमा अनिल का रास्ता काटकर डॉ. अनुराग को प्राचार्य बनाकर प्रशासन के शिकंजे में फंसने के बाद प्रबंधन अब कोई नया नाम ला सकता है। इसके लिए कॉमर्स विभाग के शिक्षक डॉ. पीके अग्रवाल का नाम चर्चा में है। हालांकि इस चर्चा के साथ यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जब वरिष्ठता के कारण डॉ. अनुराग का दावा खारिज हो गया तो डॉ. अग्रवाल को कैसे प्राचार्य बनाया जा सकता है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि प्रबंधन इस बारे में लगातार रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। सोमवार को कॉलेज में कुछ शिक्षकों की इसी पर चर्चा करने के लिए बैठक भी बुलाई गई है।