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जहां संसाधन नहीं उनको भी बना दिया परीक्षा केंद्र, बोर्ड ने जारी की 134 प्रस्तावित केंद्रों की सूची

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बरेली। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बोर्ड परीक्षा 2020 के लिए प्रस्तावित परीक्षा केंद्रों की सूची जारी कर दी है। इस बार 134 केंद्र बनाए गए हैं। जानकारी है कि कुछ ऐसे राजकीय कॉलेजों को केंद्र बना दिया गया है जहां सुविधाएं ही नहीं हैं। वहीं कुछ कॉलेज ऐसे हैं जिनका आवंटन दूर कर दिया गया। फिलहाल प्रस्तावित सूची पर 14 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद फाइनल सूची जारी होगी।
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राजकीय हाईस्कूल सबरा बहेड़ी, राजकीय हाईस्कूल बीजामऊ, जीआईसी बिशारतगंज, जीआईसी शेरगढ़ और डीके सकलैनी बहेड़ी में संसाधन पूरे नहीं हैं। बावजूद इसके इनको केंद्रों की सूची में शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार यहां न तो आधारभूत सुविधाएं हैं और न ही शिक्षकों की संख्या ही पूरी है। एसएपी नवाबगंज, जगमाल सिंह यादव आंवला, म्यूज इंटर कॉलेज पिछले साल केंद्रों की सूची में थे। इस बार इनको बाहर कर दिया गया। कुछ वित्तविहीन कॉलेजों को पहली बार केंद्र बनाया गया है। इसमें ज्वाला प्रसाद केसरपुर जैसे कॉलेज शामिल हैं। परिषद ने तय किया था कि लड़कियों के लिए पांच किमी. और लड़कों के लिए 10 किमी. के दायरे में केंद्र बनाए जाएंगे, जबकि सूची में कुछ कॉलेज ऐसे हैं जिनका आवंटन 10 किमी. से अधिक की दूरी पर कर दिया गया है। फिलहाल प्रस्तावित सूची पर 14 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं।
प्रभारी डीआईओएस डॉ. सुभाष चंद्र मौर्या ने बताया कि प्रस्तावित सूची जारी हो गई है। 14 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई हैं। जिला समिति द्वारा आपत्तियों का निस्तारण कर रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी जिसके बाद फाइनल रिपोर्ट जारी होगी।
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करीब एक हजार छात्र घटे पर परीक्षा केंद्र बढ़े
इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में एक हजार से ज्यादा परीक्षार्थी कम हो गए हैं, लेकिन परीक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई है। पिछले साल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में 93387 परीक्षार्थियों के लिए 128 केंद्र बनाए गए थे, जबकि इस बार 92367 है और केंद्रों की संख्या 134 है।

राजकीय कॉलेज हो सकते हैं सूची से बाहर
शासन ने कड़े फरमान जारी किए थे कि बिना संसाधन वाले कॉलेजों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। बावजूद इसके कई राजकीय हाईस्कूल प्रस्तावित केंद्रों की सूची में शामिल कर लिए गए हैं, जबकि यहां सुविधाएं नहीं हैं। इसके अलावा कुछ वित्तविहीन कॉलेज भी ऐसे ही हैं। इनको सूची से बाहर किया जा सकता है। प्रभारी डीआईओएस डॉ. सुभाष चंद्र मौर्या ने बताया कि जहां संसाधन नहीं होेंगे उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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