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उग हो सूरज देव अरग के बेर भइल...

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बरेली। सूर्याषष्ठी व्रत के चौथे और अंतिम दिन बृहस्पतिवार सुबह नाथनगरी में जगह-जगह बनाए गए कृत्रिम घाटों पर आस्थावान व्रती महिलाओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने सूर्य देव को नीर-क्षीर अर्घ्य की धारा आस्था से अर्पित कर परिवार की मंगलकामना का आशीष मांगा। अर्घ्य अर्पित करने के दौरान मेले जैसा नजारा रहा।
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भगवान भास्कर को छठ का आखिरी अर्घ्य अर्पित करने के लिए सुबह साढ़े तीन बजे से ही महिलाएं घाट पर जमा होनी शुरू हो गईं। कई महिलाएं नंगे पांव घाट तक पहुंची। व्रती महिलाओं के साथ उनके परिवार के सदस्य सिर पर पूजा की टोकरी लेकर पहुंचे। सुबह पांच बजे तक यूनिवर्सिटी में बनाए गए घाट पर व्रती महिलाओं की खासी भीड़ जमा हो गई। पारंपरिक परिधानों में नाक तक लंबा सिंदूर लगाए महिलाओं ने घाट के किनारे ही विधि-विधान से छठी मैया की आराधना की। इस दौरान व्रती महिलाओं के साथ घाट के किनारे पर बैठीं उनके परिवार की महिलाएं छठी मैया के गीत गाती रहीं।
घाट के किनारे पर पूजा-अर्चना करने के बाद महिलाएं उदीयमान सूर्य के दर्शन करने के लिए घुटनों से ऊपर तक पानी में उतर गईं। भगवान भास्कर के उदय होने तक महिलाएं धीरज के साथ ठंडे पानी में खड़े होकर हाथ में पूजा की टोकरी लिए आराधना करती रही। साढ़े छह बजे के करीब जैसे ही आसमान में सूर्य की पहली किरण बिखरी महिलाओं ने जयकार के साथ सूर्य भगवान को छठ का अंतिम अर्घ्य अर्पित किया। सूर्य भगवान को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाओं ने परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर व्रत का पारायण किया। इसके साथ ही चार दिन से चल रहा अनुष्ठान संपन्न हो गया।
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लंबी होती है पति की आयु
छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के दौरान माथे से लेकर नाक तक लंबा सिंदूर लगाती हैं। छठ व्रत के दौरान सिंदूर का खास महत्व है। पूर्वांचल समाज के लोगों ने बताया कि संतान प्राप्ति के साथ ही छठ का व्रत पति की लंबी आयु की कामना के लिए रखा जाता है। पूजा में सुहाग के प्रतीक सिंदूर का खास महत्व है। मान्यता है कि मांग में लंबा सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है।
छठ मैया की आराधना और पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। छठ मैया के आशीर्वाद से जीवन में अब तक सब कुछ अच्छा होता आया है। - सारिका
हर साल छठ पर्व का इंतजार रहता है। छठ मैया के आशीर्वाद से विधि-विधान से आज तक हर बार व्रत पूरा किया है। व्रत में कभी कोई परेशानी नहीं हुई। - किरण
छठ मैया के व्रत से नई ऊर्जा मिलती है। व्रत के दौरान होने वाले अनुष्ठान हमें प्रकृति के और करीब ले जाते हैं। छठ व्रत को लेकर खासा उत्साह रहता है। - मीरा, सुरेश शर्मा नगर
छठी मैया के व्रत से आत्मिक सुख मिलता है। मैया से आज तक जो भी मनौती मांगी है, पूरी हुई है। परिवार के दूसरे सदस्य भी पर्व का लेकर उत्साहित रहते हैं। - चंद्रावती, महानगर
पीढ़ियों से परिवार में छठ मैया की पूजा होती आई है। 30 साल से मैं भी छठ का व्रत रख रहीं हूं। छठी माता के पूजन से वर्ष भर सब कुछ अच्छा बीतता है। - रीमा
पिछले 40 साल से हमारा परिवार बरेली में छठ का त्योहार मनाता आ रहा है। यूनिवर्सिटी में कुछ समय पहले जब पूजा की शुरूआत की थी तो दो से तीन लोग ही आते थे। अब पर्व के दौरान सैकड़ों लोग जुटने लगे हैं। - मूंगेलाल यादव
छठ का पर्व समाज को जोड़ने में भी अपनी भूमिका अदा करता है। शहर में रहने वाले पूर्वांचल समाज के कई लोग घाट पर ही परिचित बने। अब उन लोगों से पारिवारिक रिश्ता जुड़ गया है। - सच्चिदानंद सिंह
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