मिनी बाईपास रोड पर डा. दिवाकर नर्सिंग ध्वस्त करने पहुंची बीडीए की टीम को हंगामे के बार बैरंग लौटना पड़ा। नर्सिंग होम की आईसीयू यूनिट में बड़ी संख्या में भर्ती मरीज गंभीर हालत में थे। उनके तीमारदार हंगामा करने लगे। ध्वस्तीकरण की बात पता चलने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पदाधिकारी भी पहुंच गए। डॉक्टरों की बीडीए टीम से नोकझोंक भी हुई। काफी देर तक चले हंगामे के बाद मरीजों की स्थिति को देखते हुए एसीएम फर्स्ट ने नया मरीज अस्पताल में भर्ती न करने और पुराने मरीजों को शिफ्ट करने के लिए 10 दिन का समय दे दिया। मिनी बाईपास रोड पर बीडीए ने डा. दिवाकर के नर्सिंग होम को ध्वस्त करने के आदेश तो कर दिए लेकिन इसी मार्ग पर अनाधिकृत तरीके से बिना नक्शा स्वीकृत कराए बन रहे दो दर्जन से ज्यादा कांपलेक्स, नर्सिंग होम, दुकाने और भवनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। बृहस्पतिवार को डिप्टी सेक्रेटरी अजय कुमार, एसीएम फर्स्ट, सीओ आकाश तोमर समेत बीडीए इंजीनियर जेसीबी लेकर लाव लश्कर के साथ नर्सिंग होम गिराने पहुंचे। यहां अस्पताल की आईसीयू यूनिट में बड़ी संख्या में सीरियस मरीज भर्ती थे। उनके तीमारदारों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। बीडीए टीम मरीजों को निकालकर बिल्डिंग गिराना चाहती थी। आईएमए पदाधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर विरोध जताया। एसीएम फर्स्ट ने नर्सिंग होम मालिक को 10 दिन का टाइम दे दिया। ध्वस्तीकरण की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई। नर्सिंग होम एसोसिएशन का विरोध इस बात पर है कि सिर्फ एक अस्पताल पर ही कार्रवाई क्यों हो रही है जबकि इस रोड पर कई अवैध निर्माण हैं।
हमने मानवता के नाते अधिकारियों से निवेदन किया है कि मरीजाें को ठीक होकर घर जाने दें उसके बाद जो कार्रवाई करना है करें। दस दिन की मोहलत मांगी गई है।
डॉ. रवीश अग्रवाल, आईएमए अध्यक्ष