द बरेली ट्रक ओनर्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी शोभित सक्सेना के मुताबिक चालकों की हड़ताल की वजह से जिले में 400 से ज्यादा ट्रक खड़े रहे। लिहाजा, सुबह से ही परचून, खाद्यान्न व अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति बाधित हुई। रेता-बजरी और भवन निर्माण सामग्री की आपूर्ति भी प्रभावित रही। हड़ताल से शहर में पहले दिन करीब 40 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा।
ईंधन आपूर्ति पर असर
ट्रकों के चक्काजाम की वजह से परसाखेड़ा स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट से ट्रक रवाना नहीं हो सके। लिहाजा, भरे सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर्स तक नहीं पहुंच सके। सोमवार को डीलरों ने गोदाम में रखे स्टॉक से उपभोक्ताओं को सिलिंडर मुहैया कराए। ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन बरेली शाखा की जिलाध्यक्ष अंजू सिंह ने बताया कि अगर दो से तीन दिन और हड़ताल जारी रही तो गोदाम में रखे सिलिंडर खत्म हो जाएंगे। जिले में प्रतिदिन तीन लाख सिलिंडरों की खपत होती है। ऐसे में लोगों के घरों में खाना पकाना मुश्किल हो जाएगा।
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ट्रक, बस, डंपर के चक्के थमने से डीजल की खपत भी प्रभावित रही। बरेली पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि हड़ताल से करीब 80 फीसदी खपत प्रभावित रही। कार, जनरेटर संचालक ही डीजल लेने पहुंचे थे। दूसरी ओर, आंवला स्थित इंडियन ऑयल के डिपो से लोड लेकर एक भी टैंकर नहीं निकले।
पेट्रोल पंप संचालक राशु अग्रवाल ने बताया कि दिन भर कोई ट्रक, बस डीजल भरवाने नहीं पहुंचा। गनीमत रही कि 31 दिसंबर को ही पेट्रोल, डीजल के टैंकर मंगा लिए थे। अगर यही स्थिति आगे भी रही तो ईंधन आपूर्ति न होने से कार, बाइक का भी संचालन ठप्प होने की आशंका से इन्कार नहीं कर सकते।
तो बढ़ जाएंगे सब्जियों के दाम
डेलापीर मंडी में विभिन्न शहरों और दूसरे राज्यों से रोज छोटे-बड़े 100 से अधिक वाहन आते हैं। मिलन वेजिटेबल एंड फ्रूट ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शुजाउर्रहमान ने बताया कि चालकों की हड़ताल की वजह से दिल्ली की आजादपुर मंडी से सब्जियां नहीं आ पा रही हैं। अगर यही हाल रहा तो सब्जियों के भाव बढ़ जाएंगे।