बरेली। शहर में मानसून की आहट के साथ ही नगर निगम की ओर से चलाए जा रहे नाला सफाई अभियान पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। नगर निगम के रिकॉर्ड में जेसीबी, पोकलेन मशीनों, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, डीजल और श्रमिकों के नाम पर लाखों रुपये का सरकारी धन पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ठेकेदारों द्वारा नालों की गहराई से सिल्ट और गाद निकालने के बजाय केवल ऊपर तैर रहा कचरा और फ्लोटिंग सामग्री हटाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। फोटो खिंचवाने और कागजों में नाले साफ हो रहे है, लेकिन शहरवासियों को राहत नहीं मिल रही है।
अलखनाथ रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल के पास बने बड़े नाले में साल भर से तली झाड़ सफाई न होने के कारण पूरी तरह कूड़े-कचरे से पटा पड़ा है। यही वजह है कि मानसून की शुरुआती एक घंटे की बारिश में ही गुलाबनगर, पंजाबपुरा, केलाबाग, सैदपुरिया और गढ़ी जैसे तमाम इलाके जलमग्न हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान कई नालों में सफाई कार्य में गंभीर खामियां सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो संबंधित ठेकेदारों पर कोई प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही कार्यप्रणाली में कोई सुधार आया। तमाम शिकायतों के बाद महापौर उमेश गौतम ने बताया कि नालों की स्थिति जानने के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा, जिससे सफाई की हकीकत पता चल सके।