16 वर्ष की उम्र में ही खाने लगी थी बाल
मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक मनोरोग का पता चलने पर उसकी काउंसलिंग की गई। युवती ने बताया कि 16 वर्ष की उम्र में वह बाल खाने लगी थी। बीते 15 वर्षों से पेट में बाल इकट्ठा होकर गुच्छा बन गया था। डॉक्टर के मुताबिक ट्राइकोलोटोमेनिया मनोरोग से पीड़ित व्यक्ति अपने सिर के बाल नोचकर खाता है। फिलहाल, कुछ माह तक उसकी काउंसलिंग जारी रहेगी। परिजन को भी निगरानी के लिए कहा है।
बरेली विस्फोट कांड: 'बेटी लाई थी तबाही का सामान, मेरा सब कुछ लुट गया', रहमान के बयान से आया नया मोड़
इससे पहले इस तरह की सर्जरी का रिकॉर्ड नहीं
एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक जिला अस्पताल में ट्राइकोलोटोमेनिया पीड़ित किसी व्यक्ति की सर्जरी इससे पूर्व कब हुई थी, इसका रिकॉर्ड नहीं है, पर बीते 25 वर्षों में ऐसा मामला सामने नहीं आया। डॉक्टरों के पैनल में वरिष्ठ सर्जन डॉ. एमपी सिंह, डॉ. अंजली सोनी, डॉ. मुग्धा शर्मा, स्टाफ नर्स भावना, मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार, डॉ. प्रज्ञा माहेश्वरी शामिल रहीं।