केस- एक
तारीन जलालनगर के रहने वाले एक व्यक्ति का 12 साल का बेटा मोबाइल पर कार्टून देखने का लती हो गया। मोबाइल नहीं देने पर आक्रामक हो जाता है। घर का सामान फेंकने लगता है। उसके पिता ने मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो उपचार शुरू किया। अब थोड़ी राहत मिली है।
केस- दो
तिलहर के एक गांव की महिला अपनी 15 वर्षीय बेटी को लेकर अस्पताल में पहुंची। उन्होंने बताया कि कोरोना के समय ऑनलाइन पढ़ाई की। तब से बेटी हर समय मोबाइल पर गेम खेलती रहती है। इंटरनेट बंद करने पर बेटी का दिल घबराने लगता है। उसकी आठ थैरेपी होने के बाद राहत मिली है।
अभिभावक भी जिम्मेदार
- माता-पिता ही अधिक समय तक मोबाइल का उपयोग करते हैं तो बच्चे भी साथ बैठकर देखते हैं।
- बच्चे भी मोबाइल लेकर कार्टून या गेम खेलने लगते हैं, वह भी इंटरनेट की जद में आ जाते हैं।
- काम निपटाने के लिए बच्चों की मां मोबाइल देकर उन्हें लती बना देती हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष गौरव वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन न होने पर घबराइट या तनाव होने लगता है। यह इंटरनेट का नशा है। आधुनिक युग में मानसिक रोग में यह बीमारी भी जोड़ी गई है। मरीजों की चिकित्सा के जरिये उपचार किया जाता है।