फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाहर न निकलें.. घरों पर ही करें सहरी और इफ्तार

सार

माह-ए-रमजानः मरकजे अहले सुन्नत से काजी-ए-हिंदुस्तान का पैगाम
 
विज्ञापन
namaz
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पांचों वक्त की नमाज, नमाजे जुमा और तरावीह भी घरों पर ही पढ़ें

बरेली। मुकद्दस माह-ए-रमजान शुरू होने से पहले खानकाह ताजुश्शरिया के सज्जादानशीन एवं काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी ने बरेली समेत मुल्क भर के मुसलमानों के लिए पैगाम जारी कर कहा है कि लोग बेवजह घर से बाहर न निकलें। सहरी और इफ्तार घरों पर ही करें। पांचों वक्त की नमाज के अलावा जुमा और तरावीह की नमाज मस्जिद में चंद लोग ही पढ़ें, बाकी लोग अपने घरों पर ही नमाज अदा करें।
विज्ञापन

दरगाह आला हजरत स्थित सुन्नी मरकज पर लॉकडाउन के मद्देनजर लगातार तमाम सूबों से फोन आ रहे थे। 25/26 अप्रैल से शुरू होने वाले रमजान को लेकर लोग पूछ रहे थे कि तरावीह, रोजा इफ्तार, सहरी को लेकर क्या निर्देश रहेंगे। उनकी इस बेचैनी को देखते हुए सोमवार को काजी-ए-हिंदुस्तान ने बयान जारी कर मुल्क भर के मुसलमानों और मस्जिद के इमामों से कहा है कि मुसलमान अपनी इज्जत की हिफाजत के साथ अपने फराइज, वाजिब एवं दीगर इबादत को बहुस्न और बखूबी अंजाम दें। इस संबंध में जमात रजा मुस्तफा के प्रवक्ता समरान खान ने काजी-ए-हिंदुस्तान के पैगाम के हवाले से कहा है कि मस्जिद में उतने ही लोग नमाज अदा करने जाएं, जितनों को प्रशासन की ओर से अनुमति हो। ऐसा कुछ भी न करें जिस पर प्रशासन को एतराज हो।

ऐसा सुलूक जायज नहीं

कुछ जगहों पर मस्जिदों के इमाम और मोअज्जिन को बगैर तनख्वाह के छुट्टी दे दी गई है। कुछ जगहों पर तो हमेशा के लिए छुट्टी दे दी है। इस सिलसिले में मरकज अहले सुन्नत की ओर से तमाम मस्जिदों के जिम्मेदारों से अपील की गई है कि ऐसे नाजुक दौर में उनके साथ यह सुलूक जायज नहीं। मरकज की ओर से दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुर्रहमान नश्तर फारूकी ने कहा है कि मस्जिदों के जिम्मेदारान को चाहिए कि उन्हें पूरी तनख्वाह दें और उनका पूरा ध्यान रखें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें