एनआरएलएम घोटाला सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) घोटाले में फंसे डीडीओ अजय प्रताप सिंह की दिक्कतें बढ़ गई हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम दिनेश कुमार सिंह ने उन्हें निलंबित करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी है। इसके साथ ही उन पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए भी सीडीओ को आदेश दे दिया है। डीडीओ के अलावा इस मामले में कई अन्य कर्मचारियों भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
2 जुलाई को सीडीओ निशा अनंत ने विकास भवन स्थित एनआरएलएम के दफ्तर में अचानक छापा मारा था। इसमें एनआरएलएम से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित रिकॉर्ड जब्त कर लिया गया था। शिकायतकर्ता महिलाओं का आरोप था कि मिशन से जुड़ी स्वयंसहायता समूह की महिलाओं को जो टैबलेट दिए गए थे, उनकी कीमत 13800 रुपये के बजाय 10 हजार रुपये थी। महिलाओं को खुद ही टैबलेट खरीदने थे। ट्रेनिंग के नाम पर महिलाओं को एक होटल में ठहराया गया था। तीन ब्लॉकों की महिलाओं को तीन कमरों में ठहराया गया। उनको भोजन भी बेहद घटिया दिया गया।
अमर उजाला से इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सीडीओ ने मामले की जांच स्वयं की और टीमों से भी कराई। जांच टीम ने गांवों में जाकर समूह से जुड़ी महिलाओं से बात की तो घोटाले की परतें खुलती चली गईं। डीडीओ अजय प्रताप सिंह पर ग्रामीण आजीविका मिशन का प्रभार था। डीडीओ पर बीडीओ उझानी का भी अतिरिक्त चार्ज था। घोटाले में भूमिका पकड़े जाने के बाद पहले उनकी पावर सीज की गई। डीएम ने उनसे एनआरएलएम और बीडीओ उझानी का चार्ज हटा दिया।
मंगलवार को पूरी रिपोर्ट देखने के बाद डीएम ने डीडीओ अजय प्रताप सिंह को निलंबित करने की सिफारिश शासन में कर दी। सीडीओ को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए।