बरेली। जिले में इन दिनों पुलिस विभाग की महिलाकर्मी नारी सशक्तीकरण की मुहिम चला रही हैं। नवरात्र के दौरान बृहस्पतिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद में पुलिस विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारी संभालने वाली ऐसी ही महिला कर्मियों ने बेबाकी से विचार रखे। उन्होंने अपनी नौकरी की मुश्किलों, परिवार से दूर रहने की विवशता या फिर परिवार को साथ रखकर भी समय न दे पाने की मजबूरी का जिक्र तो किया, लेकिन यह भी कहा कि वर्दी का जुनून उन्हें थकने नहीं देता। त्योहारों पर ड्यूटी करके वह सुकून महसूस करती हैं।
एंटी रोमियो स्क्वाॅड प्रभारी एसआई संगीता ने बताया कि उनके दस्ते की प्राथमिकता महिलाओं की सुरक्षा है। उनकी टीम पार्कों में जाकर किशोरों को पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देने के लिए समझाती है। ट्रैफिक पुलिस की कांस्टेबल पूजा तोमर ने कहा कि हमारी वजह से लोग त्योहार मना रहे हैं, चैन की नींद सो रहे हैं तो हमारे जागने का मतलब सार्थक होता है। महिला थाने की एसआई पुष्पांजलि ने बताया कि वह गांव की बेटियोें का रोल मॉडल बन चुकी हैं। बच्चियां हमसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में पूछती हैं तो अच्छा लगता है।
एसपी दक्षिणी की एसओजी में तैनात कांस्टेबल प्रमिला ने बताया कि महिलाएं पुरुषों से किसी तरह कम नहीं हैं। उनकी टीम ने पिछले दिनों अफीम का रैकेट पकड़ा था। ऑपरेशन सिंदूर ने महिलाओं के प्रति लोगों की सोच को बदल दिया है। एसएसपी कार्यालय के जन शिकायत प्रकोष्ठ की सिपाही वैशाली ने बताया कि उनके दोनों बच्चे दिल्ली में उनके पति के पास रहते हैं। त्योहार पर उनसे वीडियो कॉल पर बात करती हूं।
बहन को हौसला देकर चली गईं कुंभ ड्यूटी
आंवला थाने की दरोगा अलका चौहान ने बताया कि कुंभ ड्यूटी में जाने से एक दिन पहले मेरठ में उनकी बहन की आंत का ऑपरेशन होना था। तब एक ही दिन की छुट्टी मिली थी। उन्होंने बहन को हिम्मत बंधाई और कुंभ ड्यूटी चली गईं। सुभाषनगर थाने की सिपाही गायत्री पांडेय ने हंसते हुए बताया कि पति भी साथ रहते हैं। वह बैंक में हैं तो सप्ताह में दो दिन अवकाश पाते हैं। उन्हें सिर्फ इसी की जलन होती है, बाकी नौकरी पूरे उत्साह से करती हैं। अभियोजन कार्यालय की नियति, दरोगा शालू पंवार ने भी अनुभव साझा किए।