जिला अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चे व तीमारदारी करते परिजन
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बरेली में भीषण गर्मी का प्रकोप बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के 30 बेड के वार्ड में बुधवार को 46 बच्चे भर्ती रहे। एक बेड पर तीन बच्चों को लिटाना पड़ा। बेंच पर भी लिटाकर बच्चों का इलाज किया गया। सीएचसी पर भर्ती और इलाज की सुविधा होने के बावजूद बच्चों को रेफर करने पर जिला अस्पताल प्रशासन ने आपत्ति जताई है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, पारा सामान्य से दो-तीन डिग्री अधिक है। ऐसी स्थिति में जरा सी अनदेखी से बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या 40 के पार पहुंचना गंभीर है। आशंका जताई कि बीते दिनों बारिश के बाद अब सीधी धूप धरती पर पड़ रही है। उष्मीय विकिरण से गर्म हवा के थपेड़े झुलसा रहे हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है। दूषित खानपान बच्चों को बीमार बना रहा है। बेड भले ही भर गए हैं, लेकिन जो बच्चे गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं, उन्हें लौटा नहीं सकते। इलाज करना जरूरी है।
एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित के मुताबिक, सीएचसी पर गंभीर बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था होती है। जिन बच्चों का इलाज सीएचसी पर संभव है, उन्हें भी रेफर किया जा रहा है। बीते दिनों जिलाधिकारी और सीएमओ को मामले की जानकारी दी है।
शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज करना पड़ रहा भारी
विशेषज्ञ के मुताबिक, गर्मी में नमी वाले स्थानों पर बैक्टीरिया और वायरस का संक्रमण बढ़ता है। रोटा वायरस, ई कोलाई बैक्टीरिया दस्त की अहम वजह हैं। बच्चों का पाचन तंत्र पूरी त्र पूरा तरह विकसित न होने से संक्रमण का असर तेजी से फैलता है। शुरुआती लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से परामर्श के बजाय खुद दवा खिलाने पर हालत बिगड़ने लगती है। बिना परामर्श बच्चों को सिर्फ ओआरएस घोल देना चाहिए।