पीलीभीत में बारिश के बाद अब बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। देवहा नदी में उफान आ गया है। नदी का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। निचले इलाके भी जलमग्न हो गया है। वहीं, बारिश का पानी भी कई इलाकों में भरा हुआ है।
पीलीभीत जिले में लगातार तीन दिन से हुई बारिश से देवहा नदी उफना गई। शहर में टनकपुर हाईवे से लेकर स्टेशन मार्ग तक पानी भर गया। गौहनियां चौराहे के पास पेट्रोल पंप परिसर में भी पानी भरा रहा। हाईवे पर करीब एक फुट पानी जमा होने से वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ी। स्टेशन जाने वाले लोगों को रास्ता बदलना पड़ा। शुक्रवार सुबह से रविवार दोपहर तक हुई करीब 135 मिलीमीटर (एमएम) बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी।
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नावकूड़ गांव के 20 घरों पर खतरा
शहर से सटे नावकूड़ गांव में देवहा नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी की तेज धार से गांव के करीब 20 घर इसकी जद में आ गए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, एक मकान का कुछ हिस्सा भी कटान की चपेट में है, जिससे दहशत है। रविवार को नदी गांव की सीमा में भूमि का कटान करती रही। इसका रुख आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ खंड द्वारा लगाए गए बचाव कट्टे कारगर साबित नहीं हुए।
लगातार कटान से आबादी पर खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्थायी बचाव कार्य से स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने बारिश के बाद पत्थर की ठोकर बनाकर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
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घर के बाहर जमा रहा पानी
बारिश थमने के घंटों बाद भी नालों के चोक होने से कई इलाकों में पानी नहीं उतर सका। नखासा, फीलखाना, सुनगढ़ी, वल्लभनगर, अवध नगर और अशोक कॉलोनी समेत तमाम क्षेत्रों में सड़कों से लेकर घरों के बाहर तक पानी जमा रहा। शहर की प्रमुख सड़कों पर जलभराव के कारण दिनभर आवाजाही प्रभावित रही। कई जगह पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया। निचले हिस्सों में रहने वाले परिवारों के घरों के चबूतरों तक पानी पहुंच गया। शहर से सटी नई कॉलोनियों की स्थिति सबसे अधिक खराब रही।
हाईवे से स्टेशन तक का रास्ता गुजरने लायक नहीं
टनकपुर हाईवे शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है। रविवार को हाईवे के कई हिस्से पानी में डूबे नजर आए। गौहनियां चौराहे के पास स्थित पेट्रोल पंप परिसर में पानी भर गया। कर्मचारी जलनिकासी के लिए दिनभर प्रयास करते रहे। हाईवे से स्टेशन की ओर जाने वाले मार्ग पर करीब एक फीट पानी जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को सबसे अधिक परेशानी हुई। कई लोगों ने स्टेशन पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते का सहारा लिया।
फीलखाना की गलियां बनीं तालाब
फीलखाना में चार से पांच गलियां पूरी तरह जलमग्न रहीं। शहर के निचले हिस्से में होने के कारण यहां पानी की निकासी बेहद धीमी रही। नालों के चोक होने से गलियों का पानी सड़कों पर फैल गया। घनी आबादी के लोगों को जरूरी काम के लिए भी घर से निकलने में परेशानी हुई।
सुनगढ़ी में नाला बनने के बावजूद नालियों की पर्याप्त सफाई नहीं होने का असर दिखाई दिया। घरों के बाहर पानी जमा रहा। रविवार शाम तक यहां जलनिकासी हो सकी। वल्लभनगर, अवध नगर और अशोक कॉलोनी में भी दोपहर तक करीब एक फीट पानी जमा रहा।
चोक नालों ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश के दौरान जलभराव होना एक बात है, लेकिन वर्षा थमने के बाद भी घंटों तक पानी का जमा रहना शहर की निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कई इलाकों में नाले और नालियां पानी का दबाव नहीं संभाल सके। जगह-जगह गंदगी और कचरे से निकासी बाधित रही। निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ा।
तीन दिन की बारिश ने शहर में जलनिकासी के स्थायी इंतजाम की जरूरत फिर सामने ला दी है। प्रमुख मार्ग से लेकर रिहायशी बस्तियों तक पानी जमा होने से लोगों को न सिर्फ आवागमन में परेशानी हुई, बल्कि घरों और दुकानों के आसपास भी लंबे समय तक जलभराव बना रहा।