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विकास हुआ नहीं.. टैक्स बढ़ता चला गया

Tue, 07 Nov 2017 02:12 AM IST
बरेली
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नगर निगम की टैक्स दरों को लेकर अब भी खींचतान चल रही है। शहर के लोगों का कहना है कि विकास कराया नहीं और टैक्स कई गुना बढ़ा दिया गया है। अब शासन ने भी नगर निगम को फिर पत्र लिखकर इतना ज्यादा टैक्स बढ़ाने का आधार पूछा है। विशेष सचिव अनिल कुमार बाजपेयी की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि बरेली में टैक्स निर्धारण को लेकर कई कठिनाइयां आ रही हैं। इसका समाधान करने की जरूरत है। नगर निगम से इस बाबत एक सप्ताह में जवाब मांगा गया है। 
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टैक्स की यह है लड़ाई 
टैक्स विरोधी संघर्ष समिति का कहना है कि बरेली में कानपुर, गाजियाबाद और आगरा से अधिक टैक्स लिया जा रहा है, जबकि यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। बरेली में आवासीय टैक्स के अलावा कॉमर्शियल टैक्स शासन की नियमावली के बाद अचानक छह गुना तक बढ़ गया है। छूट भी सिर्फ  आवासीय टैक्स जमा करने पर दी जा रही है, जबकि कामर्शियल पर कोई छूट नहीं है। इसका भी विरोध है। 

अधिनियम तो यह कहता है 
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 के मुताबिक किसी विधि न्यायालय के किसी आदेश या निर्णय के परिणामस्वरूप नई निर्धारण सूची या उसका कोई भाग प्रभावी न हो सकता हो तो ऐसे आदेश या निर्णय के अधीन रहते हुए पुरानी निर्धारण सूची या उसक ा तद्नुरूप भाग प्रभावी समझा जाएगा।
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दायरा बढ़ाया नहीं, टैक्स दर बढ़ाते रहे 
नगर निगम की आबादी करीब 10.5 लाख है। कर के दायरे में डेढ़ लाख लोग आते हैं जबकि कर जमा करने वाले मात्र 45 हजार लोग हैं। पिछले पांच साल में नगर निगम ने न तो शहर का सर्वे किया है और न ही करदाताओं की संख्या बढ़ाई है। जितने करदाता थे उन्हीं से टैक्स वसूलते रहे। जब टैक्स की बढ़ी हुई नई टैक्स दर लागू की गई तभी टैक्स जमा करने वाले नाराज हो गए। निगम प्रशासन टैक्स बढ़ाने में ही लगा रहा जबकि करदाताओं का दायरा नहीं बढ़ाया। इसीलिए हर साल लक्ष्य से आधा ही टैक्स वसूला गया। 

वेबसाइट से भी लगा चूना 
नगर निगम के टैक्स जमा करने वाले सॉफ्टवेयर को एनआईसी से अपडेट करने के चक्कर में लाखों रुपये का नुकसान हुआ। अब भी मैनुअल बिल जमा किए जा रहे हैं जबकि संशोधन के कई बड़े बिल अटके हैं। करीब एक साल होने को है लेकिन अभी तक वेबसाइट ठीक नहीं हुई है। इससे करीब दस करोड़ के बिल जमा नहीं हो पाए हैं। 


टैक्स का हाल
शहर में आबादी-   11 लाख 
कर दायरे में-       डेढ़ लाख
करदाता-           45 हजार 



कानपुर और बरेली टैक्स में अंतर 
कानपुर शहर        टैक्स दर 
ओल्ड कानपुर    1.67 
गोविंद नगर        1.33
मसवानपुर        1.29
सरायमिता        0.94
अशोकनगर        1.84 
लाजपत नगर    1.84

बरेली                टैक्स दर 
बिहारीपुर            2.60
सिठौरा                2.10
सनैया धनसिंह      2.10
स्वालेनगर            2.00
राधेश्याम एन्क्लेव    2.00
रामपुरबाग            3.40 
बाकरगंज            2.10

(नोट- टैक्स दर रुपये में हैं और इनका निर्धारण 25 मीटर से अधिक चौड़ी रोड पर स्थित भवनों के किराये के आधार पर किया गया है।)

इनकी भी सुनिए
   
टैक्स वसूलने के लिए निगम को अपना दायरा बढ़ाना चाहिए न की दरें। लोगाें को प्रोत्साहित करें और कुछ छूट तथा इंस्टॉलमेंट में वसूली की जा सकती है। लोगों को लगता है कि निगम उनको क्या दे रहा है जबकि टैक्स अधिक है। इस चीज को दूर करने की जरूरत है। हम लोगों को अप्रोच नहीं कर पा रहे हैं। हमारे समय में भी लोगों को कई तरह से राहत दी गई थी। 
- सुप्रिया ऐरन, पूर्व महापौर 

मैंने पहले भी कहा है कि बरेली का आवासीय टैक्स ज्यादा नहीं है। शासन की नई नियमावली से कॉमर्शियल टैक्स बढ़ गया है जिसका मैंने पिछली सरकार में भी विरोध किया था और इस सरकार में भी। जब तक इसे बदला नहीं जाएगा तब तक टैक्स दरें कम नहीं होंगी। मेरी मंत्री सुरेश खन्ना से भी मुलाकात हुई थी, उन्होंने भी आश्वासन दिया था। हम लोग कॉमर्शियल को छूट भी नहीं देते जबकि उनको जरूरत है। 
- डॉ. आईएस तोमर, निवर्तमान मेयर 

आचार संहिता लग गई है, नहीं तो इस बार टैक्स को लेकर घोषणाएं हो जाती। फिलहाल टैक्स के लिए शासन से वार्ता हो चुकी है। हमारे घोषणा पत्र में भी इसका जिक्र मिलेगा। 
- डॉ. अरुण कुमार, नगर विधायक 

टैक्स को लेकर शासन की ओर से जो पत्र मिला है, उस पर लगातार काम चल रहा है। एक सप्ताह में जवाब दिया जाएगा। 
- आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त 

टैक्स को जब तक कम नहीं कराया जाएगा तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। निगम ने लोगों को धोखा दिया है। टैक्स कानपुर और गाजियाबाद से अधिक है, इसे कम कराकर ही रहेंगे। 
- सतीश रोहतगी, अध्यक्ष, टैक्स विरोधी संघर्ष समिति 

कानपुर और गाजियाबाद की तुलना में बरेली का टैक्स ज्यादा है। हम मेयर काउंसिल और सरकार के माध्यम से इस मामले को आगे बढ़ाएंगे। जनता का अहित नहीं होने देंगे। जब टैक्स कम हो जाएंगे तो हर व्यक्ति ईमानदारी से टैक्स जमा भी करेगा। 
- सुभाष पटेल, पूर्व मेयर 

अभी तक जो मेयर थे, उन्होंने टैक्स कम करने का कोई प्रयास नहीं किया। अब जो नया मेयर होगा वही टैक्स कम कराने को बोर्ड में प्रस्ताव पास कराकर शासन को भेजेगा। 
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- राजकुमार अग्रवाल, प्रथम मेयर, बरेली 
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