अगर आपको बिजली का नया कनेक्शन लगवाना है या फिर खराब मीटर बदलवाना है तो बेहतर होगा कि आप कोई बिचौलिया पकड़कर बिजली विभाग में संपर्क करें। कनेक्शन लेने और मीटर लगवाने के लिए सरकार ने जो व्यवस्था तय कर रखी है, उसके मुताबिक चले तो सालों बाद भी आपका काम होना मुश्किल है। बिजली विभाग में चल रही इस धांधली की एक मिसाल यह है कि नए कनेक्शन आसानी से उपलब्ध कराने के लिए सरकार चार किलोवाट तक के कनेक्शन के आवेदनों पर बी एंड एल फार्म की अनिवार्यता खत्म कर चुकी है, लेकिन उपखंड कार्यालयों में सीधे पहुंचने वाले आवेदकों से अभी भी यह फार्म भरवाए जा रहे हैं।
लाइन हानियां कम करने के लिए प्रदेश सरकार का जोर ज्यादा से ज्यादा नए कनेक्शन देने पर हैं। कुछ समय पहले इसके लिए प्रदेश भर में विशेष शिविरों का आयोजन किया गया था, जिनमें सरकार के मंत्रियों ने खुद जरूरतमंद लोगों को कनेक्शन दिए थे, लेकिन अब हाल यह है कि बिजली विभाग के अफसरों ने फिर इन आवेदनों को जेबें गर्म करने का धंधा बना रखा है। बिजली विभाग की मनमानी का नतीजा यह है कि न सिर्फ बिजली की चोरी बढ़ रही हैं बल्कि थ्रू रेट भी कम हो रहे हैं। बिचौलियों का खेल पूरी तरह उपभोक्ताओं पर हावी है। तीन महीने पहले ही ऐसी ही धांधली की वजह से नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार से कुतुबखाना उपकेंद्र पर विवाद हुआ था। इस घटना के बाद भी बिजली विभाग की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ।
घरेलू कनेक्शन के लिए मनमानी वसूली
लगभग सभी उपखंडों में तैनात बाबुओं ने समानांतर कार्य व्यवस्था बना रखी है। ज्यादातर बाबुओं ने अपने पास अवैध रूप से कम से कम दो दो प्राइवेट कर्मी तैनात कर रखे हैं जो नए कनेक्शन और खराब मीटर बदलवाने का सौदा पटाते हैं। एक कनेक्शन पर कम से कम एक हजार रुपये अतिरिक्त वसूल किए जाते हैं। विभाग पर हावी बिचौलिए ही कनेक्शन या मीटर बदलने के आवेदन पर सर्वे रिपोर्ट लगवाते हैं। अगर वांछित रकम न दो तो कनेक्शन मिलना आसान नहीं है।
खराब मीटर भी नहीं बदले जाते
खराब मीटर या केबिल क्षतिग्रस्त होने पर दूसरा मीटर बदलवाने के लिए तो आपकी चप्पलें ही घिस जाएंगी क्योंकि इसके लिए भी उपखंड कार्यालयों में बाबुओं के चक्कर लगाने पड़ते हैं। आखिरकार में बिचौलियों की शरण लेने के बाद ही काम बन पाता है। सोमवार दोपहर एक गरीब महिला अपना खराब मीटर बदलवाने राजेंद्रनगर उपकेंद्र पहुुंची तो बाबू एसपी मौर्य ने मीटर स्टाक में न होने का बहाना बना दिया। महिला ने दुखड़ा रोना रोया तो दलाल से मिलने की सलाह दे दी। इसके बाद 1500 रुपये में सौदा पटा और फिर हाथोंहाथ मीटर बदल गया। इस धंधे की भनक जेई को भी नहीं लग पाई। कुतुबखाना उपकेंद्र पर विधायक से अभद्रता करने के दोषी अवनीश त्रिवेदी ही इस क्षेत्र में एसडीओ मीटर हैं।
मुफ्त मिलने वाले फार्म पर दो सौ रुपये की वसूली
नई व्यवस्था के मुताबिक चार किलोवाट क्षमता तक कनेक्शन के लिए बी एंड एल फार्म की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद आवेदकों को बाहर से फार्म खरीदकर लाने को बाध्य किया जा रहा है। यह फार्म दो-दो सौ रुपये में बेचे जाते हैं जबकि विभागीय निर्देशानुसार घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन फार्म उपखंड कार्यालयों पर फ्री दिए जाने हैं। उपकेंद्रों पर नया कनेक्शन टैरिफ तक प्रदर्शित नहीं है। ज्यादातर लोग एक, दो और तीन किलोवाट घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन करते हैं। रसीद कटने के बाद मीटर लगाने के नाम पर अलग से पांच सौ रुपये तक वसूले जाते हैं।
हर महीने 1500 कनेक्शन
चारों शहरी विद्युत वितरण खंडों से हर माह औसतन 1500 नए कनेक्शन जारी हो रहे हैं। करीब तीन सौ से ज्यादा मीटर खराब होने अथवा अन्य कारणों से बदले जाने के मामले आते हैं, लेकिन तीन मीटर खंडों का प्रभार एक ही एसडीओ पर होने से अव्यवस्था बनी हुई है और मनमानी वसूली हो रही है।
घरेलू कनेक्शन पर अवैध वसूली
किलोवाट तय शुल्क वसूली
एक 1805 2500
दो 2225 3000
तीन 3155 4000
‘सिंगल और थ्री फेस के मीटरों की कोई कमी नहीं है। नए कनेक्शन के लिए शुल्क निर्धारित है। किसी को मीटर संबंधी कोई शिकायत है तो हमारे कार्यालय में संपर्क कर सकता है।’
- वीके पाठक, अधिशासी अभियंता (मीटर)