हाफिजगंज (बरेली)। सड़क हादसे में भाई बहन की मौत से भड़सर गांव में मातम पसर गया। पिता की बरसी के लिए परिवार पहले से तैयारी कर रहा था। चर्चा थी कि बहन मिस्कीन की जान बच सकती थी, लेकिन वह रात में जल्दबाजी में ही भाई के साथ आने के लिए लालकुआं से कार में सवार हो गई।
परिजनों ने बताया कि मुन्ने के पिता बाबू बख्श की एक साल पहले बीमारी की वजह से मौत हो गई। मंगलवार को उनकी पहली बरसी थी। इसके लिए परिवार ने काफी तैयारी थी। मुन्ने की बड़ी बहन खुशनुमा हल्द्वानी में और छोटी बहन मिस्कीन की शादी लालकुआं में हुई थी। खुशनुमा के जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ था जिन्हें अस्पताल में देखने परिवार गया था। चूंकि मंगलवार सुबह पिता की बरसी करनी थी तो सोमवार रात में ही ये लोग हल्द्वानी के अस्पताल से चल दिए थे। मिस्कीन ने फोन पर भाई से बात के बाद गांव आकर बरसी में शामिल होने का मन बना लिया। लोग चर्चा कर रहे थे कि मौत ही मिस्कीन को खींच लाई, वर्ना उसकी जान बच सकती थी। संवाद
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दो साल पहले हुई थी शादी
- मुन्ने बख्श की शादी दो साल पहले हुई थी। पत्नी नाजिश के कोई संतान नहीं है। मिस्कीन लालकुआं में रेलवे फाटक के पास रहती थीं, उनके पांच बच्चे हैं। सुबह उनके पति व परिवार के अन्य लोग भंडसर आ गए।