बरेली। विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन जिले में बेटियों के लिए बॉक्सिंग के हालात खराब हैं। अच्छे प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ी या तो बाहर चली गई, जो नहीं जा सकी वह बिना कोच के स्वयं बॉक्सिंग का अभ्यास कर रही हैं।
महिला खिलाड़ियों का कहना है बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए अच्छा कोच व संसाधन जरूरी हैं, लेकिन कोरोना के बाद से स्टेडियम में कोच नहीं है, और प्राइवेट अकादमी भी केवल शौकिया ट्रेनिंग ही दे पाती हैं। इस कारण शहर में महिला बॉक्सर भी गिनी-चुनी रह गई हैं, इसलिए अधिकांश ट्रायल में महिला खिलाड़ी केवल एक-दो ही पहुंचती हैं। संवाद
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क्या बोली महिला खिलाड़ी
मैं अंडर 19 वर्ग में खेलती हूँ, जब स्टेडियम में प्रशिक्षण नहीं मिला तो अपने घर में ही मुक्केबाजी का अभ्यास करती हूं, इस बार मौके कम होते देख कुश्ती में भी हाथ आजमाया। - नैना, खिलाड़ी
- मैंने बॉक्सिंग की शुरुआत स्पोर्ट्स स्टेडियम से की। खेल विभाग से लेकर एसोसिएशन तक सपोर्ट नहीं मिला, इसलिए अभ्यास करने मेरठ जाना पड़ा। प्राइवेट अकादमी में भी उस स्तर की ट्रेनिंग नहीं मिलती। - मीमंसा पांडेय, राष्ट्रीय खिलाड़ी
- 2017 तक स्पोर्ट्स स्टेडियम के कोच थे तो महिला बॉक्सरों की भीड़ रहती थी, लेकिन अब न तो अधिक प्रतियोगिताएं होती है और न ही महिला खिलाड़ी इनमें खुलकर भाग लेती हैं। - सौम्या शुक्ला, राष्ट्रीय खिलाड़ी
बॉक्सिंग के लिए खिलाड़ियों के लिए शहर में बेहतर सुविधाएं नहीं है। जिलाधिकारी से भी खिलाड़ियों ने स्टेडियम में कोच दिलवाने का अनुरोध किया था। मेरे स्तर से भी आरएसओ को भी कोच दिलवाने के लिए पत्र दिया जा चुका है। स्पोर्ट्स स्टेडियम शहर के खिलाड़ियों के लिए खेलों का केंद्र है, जब वहां कोच नियुक्त होंगे तो खिलाड़ियों को सुविधा हो सकेगी। - आर्यन चौधरी, सचिव, जिला बॉक्सिंग संघ