सीजेएम कोर्ट में चल रहा है 15 सौ कर्मचारियों के पीएफ का केस
बरेली। रबर फैक्टरी के कर्मचारियों के प्रॉविडेंट फंड यानी पीएफ के मामले केस में सीजेएम की अदालत में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। इस केस में फैक्टरी के निदेशक अजय किलाचंद प्रतिवादी हैं जो पिछले छह सालों में एक बार भी अदालत में हाजिर नहीं हुए हैं। इस बीच उनके नाम कई समन भी जारी हो चुके हैं लेकिन एक भी समन तामील नहीं हो पाया है।
प्रॉविडेंट फंड निरीक्षक बीएम कांडपाल की ओर 12 फरवरी 2015 को बरेली के सीजेएम कोर्ट मेें रबर फैक्टरी के निदेशक के खिलाफ शिकायत दाखिल की गई थी जिसमें कहा गया कि सिंथेटिक एंड केमिकल्स लिमिटेड एक प्रतिष्ठान है लिहाजा उस पर कर्मचारी भविष्य निधि के उपबंध लागू होते हैं। कंपनी के निदेशक अजय किलाचंद की ओर से कर्मचारियों के भविष्य निधि फंड में अगस्त 1998 से नवंबर 1999 तक का पैसा नहीं दिया है जो कानूनी तौर पर जुर्म है। इस मामले में श्रम एवं रोजगार विभाग की ओर से भी अभियुक्त अजय किलाचंद के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जा चुकी है।
प्रॉविडेंट फंड निरीक्षक की ओर से इस अर्जी में अदालत से कानून के मुताबिक अभियुक्त अजय किलाचंद को कैद और जुर्माने की सजा देने का आग्रह किया गया था। छह साल पहले अदालत में यह शिकायत दाखिल होने के बाद अजय किलाचंद को कई समन जारी किए गए लेकिन एक भी समन तामील नहीं हो पाया। लिहाजा वह अब तक अदालत में हाजिर भी नहीं हुए हैं। अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार यानी 25 जून को होनी है।
बता दें कि इसी प्रकरण में अजय किलाचंद की ओर से वर्ष 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्टे के लिए अर्जी दी गई थी लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिल सकी। हालांकि इसके बावजूद न फैक्टरी प्रबंधन की ओर से भविष्य निधि का पैसा जमा किया गया न ही अजय किलाचंद अदालत हाजिर हुए।
16 जुलाई 1999 को बंद हुई थी रबर फैक्टरी
रबर फैक्टरी 16 जुलाई 1999 को सवैतनिक अवकाश के आदेश के साथ बंद कर दी गई थी। इसके बाद कर्मचारियों को न वेतन मिला और न ही भविष्य निधि का पैसा। फैक्टरी प्रबंधन पर करीब 15 सौ कर्मचारियों का भविष्य निधि का पैसा बकाया है। इस निधि में दस प्रतिशत कर्मचारियों का और दस प्रतिशत फैक्टरी प्रबंधन का हिस्सा है। 20 सालों से ज्यादा समय से बंद पड़ी फैक्टरी का करीब 14 सौ एकड़ का परिसर अब जंगल बन चुका है जहां हिंसक जंगली जानवरों ने भी ठिकाना बना रखा है। हाल ही में फैक्टरी के जंगल से एक बाघिन को पकड़कर दुधवा के जंगल में भेजा गया है।
मुंबई हाईकोर्ट में सुनवाई की जल्द मिल सकती है तारीख
बरेली। रबर फैक्टरी भूमि पर पुन: प्रवेश और स्वामित्व के लंबित मामले में भी मुंबई हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई हो सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी के चलते कोर्ट की गतिविधियां प्रभावित रहीं। इसकी वजह से सुनवाई के लिए तारीख नहीं मिल सकी थी। उम्मीद है कि अगले दस दिन में सुनवाई के लिए तारीख मिल जाएगी।
बता दें कि सरकार और प्रशासन की ओर से रबर फैक्टरी की जमीन को अपने स्वामित्व में लेने के मामले में प्रभावी पैरवी न किए जाने पर करीब आठ माह पहले मुंबई हाईकोर्ट ने रिसीवर को यह जमीन अलकेमिस्ट की सुपुर्दगी में देने का आदेश जारी कर दिया था। जनप्रतिनिधियों के जरिए मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ तक पहुंचा। बरेली किसान सम्मेलन में भाग लेने आने पर मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि फैक्टरी की जमीन पर कब्जा लेकर सरकार उस पर शैक्षिक, औद्योगिक , चिकित्सा शिक्षा या स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां शुरू कर सकती है। मुख्यमंत्री का रुख देख अफसरों ने मुंबई हाईकोर्ट में पुन: प्रवेश और स्वामित्व के लिए प्रयास शुरू किए। हालांकि, इस बीच कोरोना की दूसरी लहर हावी होने से कोर्ट में सुनवाई की तारीख नहीं मिल सकी। अब सुनवाई के लिए जल्द तारीख मिलने की उम्मीद है।