बरेली। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी अहसन मियां ने भाजपा के प्रवक्ताओं के पैगंबर पर टिप्पणी करने के बाद हो रहे प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और घरों पर बुलडोजर चलाए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रवक्ताओं की गिरफ्तारी की मांग करते हुए मुसलमानों से कहा है कि वे सांविधानिक ढंग से अपनी बात हुकूमत तक पहुंचाएं। किसी भी हाल में देश का माहौल खराब न होने दें।
अपने मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी के जरिए जारी बयान में सज्जादानशीन ने रांची में हुए बवाल की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए झारखंड सरकार से इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नमाज के बाद निहत्थे मुसलमानों पर पुलिस ने गोलियां चलाईं जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। कई लोग अस्पतालों में जिंदगी-मौत के बीच जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में पुलिस-प्रशासन दोहरा रवैया अपना रहा है। मुसलमानों के अलावा कोई समुदाय धरना-प्रदर्शन करता है तो पुलिस हाथ बांधे खड़ी रहती है। मुसलमान अगर जायज मांग के लिए आवाज उठाते हैं तो उन्हें गोली का निशाना बनाया जाता है।
अहसन मियां ने कहा कि देश में सभी को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का हक है। फिर भी पुलिस ने हवाई फायरिंग के नाम पर बेकसूरों के सिर और सीने को निशाना बनाया जिसकी जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कानपुर और प्रयागराज में घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। कहा, जज और कोर्ट-कचहरी की जगह बुलडोजर ने ले ली है। गुनाह और बेगुनाही का फैसला करना कोर्ट का काम है न कि हुकूमत का। कोई गुनहगार है तो उसे सजा मिलनी चाहिए न कि घर में रहने वाले बेकसूर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को। संविधान के खिलाफ जाकर उन्हें क्यों बेघर किया जा रहा है। न्यायपालिका को उसका काम करने दिया जाए।
सज्जादानशीन ने कहा कि वक्त रहते भाजपा अपने प्रवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें जेल में डाल देती तो देश में इस तरह का माहौल पैदा नहीं होता, न विदेशों में हमारे मुल्क की बदनामी होती। उन्होंने कहा कि दुनियाभर का मुसलमान सबकुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन अपने नबी के बारे में कोई गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं कर सकता।